
चर्चा में डोनाल्ड ट्रंप के हाथ, ऐसा क्या हो गया है कि लोग शेयर कर रहे हैं उनकी हैंड पिक्चर्स
AajTak
क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर उम्र का असर दिखने लगा है और क्या इसका उनकी सेहत पर प्रभाव पड़ रहा है? सोशल मीडिया पर इन दिनों कुछ ऐसा ही दावा किया जा रहा है. ट्रंप के हाथों की कुछ तस्वीरें शेयर की जा रही हैं, जिनमें उनके हाथों पर हल्के नीले और काले निशान नजर आ रहे हैं. इन्हीं तस्वीरों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी सेहत को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद स्वीकार किया है कि वह डॉक्टरों की सलाह के बावजूद रोज तय मात्रा से ज्यादा एस्पिरिन ले रहे हैं. वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह पिछले 25 सालों से रोज 325 मिलीग्राम एस्पिरिन ले रहे हैं, जबकि डॉक्टर उन्हें कम डोज लेने की सलाह दे चुके हैं.
ट्रंप ने कहा कि मैं थोड़ा सुपरस्टिशियस हूं. कहते हैं एस्पिरिन खून को पतला करती है. मैं नहीं चाहता कि गाढ़ा खून मेरे दिल से गुजरे. मुझे पतला खून चाहिए. मायो क्लिनिक के मुताबिक, आमतौर पर लो-डोज एस्पिरिन 81 मिलीग्राम मानी जाती है. इससे ज्यादा मात्रा लेने पर खासकर बुज़ुर्ग मरीजों में पेट, आंतों या दिमाग में इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि एस्पिरिन दिल का दौरा रोकने में मदद कर सकती है, लेकिन ज्यादा डोज जोखिम भी बढ़ाती है.
हाथों पर दिख रहे नीले निशान
डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में ट्रंप के हाथों पर बार-बार नील पड़ने की तस्वीरें सामने आई हैं. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने पुष्टि की है कि ये निशान छिपाने के लिए मेकअप लगाया जाता है और ये लगातार हाथ मिलाने की वजह से होते हैं.एस्पिरिन खून पतला करती है, जिससे मामूली चोट पर भी नील जल्दी पड़ सकता है.
यह भी पढ़ें: ट्रंप के हाथ पर मोटा कंसीलर... नई फोटो पर मचा बवाल तो व्हाइट हाउस ने दी ये सफाई
उम्र और सेहत को लेकर सवाल

2025 में बड़ी बैटरी वाले फोन्स छाए रहे. चीनी कंपनियों ने 7000mAh से ज्यादा की कैपेसिटी वाले फोन्स को पेश किया और कुछ फोन्स 10000mAh बैटरी वाले भी पेश हुए. ऐसा लग रहा है कि 2026 में ये आंकड़ा 10000mAh के ऊपर चला जाएगा. सैमसंग ऐसे ही एक फोन पर काम कर रहा है, जिसमें 20000mAh की बैटरी मिलेगी. सैमसंग डुअल सेल बैटरी की टेस्टिंग कर रहा है.

व्हेल और मगरमच्छों की हड्डी तक को चबा जाने वाले जॉम्बी वॉर्म यानी जॉम्बी कीड़े खत्म हो रहे हैं. इससे दुनियाभर के वैज्ञानिक डरे हुए हैं. एक शोध में पता चला कि समुद्र के एक हिस्से में इन जॉम्बी कीड़ों की प्रजाति खत्म हो चुकी है. ऐसे में जानते हैं आखिर ये जॉम्बी वॉर्म होता क्या है और इसके विलुप्त होने से वैज्ञानिक क्यों डरे हुए हैं.











