
गुजरात हाईकोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार से छूट देने वाले क़ानून की समीक्षा करने पर सहमति जताई
The Wire
गुजरात हाईकोर्ट ने वडोदरा के एक शख्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले पर केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया. आईपीसी की धारा 375 (बलात्कार) के अपवाद-2 में कहा गया है कि एक पुरुष का अपनी पत्नी के साथ उसकी सहमति के बिना यौन संबंध बनाना ‘बलात्कार’ नहीं है.
नई दिल्लीः बलात्कार, असहमति से बने यौन संबंध और यौन उत्पीड़न को लेकर बने कड़े कानूनों के बावजूद भारत में कानून वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) को लेकर ‘अपवाद’ है, जिसके तहत पत्नी की सहमति के बिना उससे यौन संबंध बनाने पर पति को सजा से छूट दी गई है.
आईपीसी की धारा 375 (बलात्कार) के अपवाद-2 में कहा गया है कि एक पुरुष का अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध ‘बलात्कार’ नहीं है. भले ही उसने इसके लिए अपनी पत्नी को उसकी इच्छा के विरुद्ध या उसकी सहमति के बिना मजबूर किया हो. यह अपवाद पति को अपनी पत्नी के यौन उत्पीड़न के लिए धारा 376 के तहत दंड से बचाव की छूट देता है, बशर्ते पत्नी की आयु 15 वर्ष से अधिक हो. मतलब पति को बलात्कार के लिए दंडित नहीं किया जा सकता.
इस मामले पर गुजरात हाईकोर्ट ने बीते 14 दिसंबर को वैवाहिक बलात्कार को ‘अपवाद’ के रूप में वर्गीकृत करने की संवैधानिक वैधता की दोबारा जांच करने पर सहमति जताई है.
गुजरात हाईकोर्ट ने ने कहा था कि अब इस पर विचार करने का समय आ गया है कि क्या वैवाहिक बलात्कार को दी गई छूट ‘स्पष्टत: मनमानी’ है.

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