
गाजा में सेना भेज पाकिस्तान दिखाना चाहता है 'चौधराहट', लेकिन जिन्ना के 'इजरायल हेट' का क्या होगा?
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डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा प्लान की घोषणा करते हुए कहा कि पाकिस्तान इससे 100 फीसदी सहमत है. इसके बाद पाकिस्तान गाजा में 'शांति सेना' भेजने पर विचार करने लगा है. लेकिन ऐसा करके पाकिस्तान अपने ही संस्थापक जिन्ना के नफरती सिद्धांतों से मुंह मोड़ लेगा. ऐसी कोशिश के लिए शहबाज शरीफ को अभी से ही पाकिस्तानी फटकारने लगे हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा पीस प्लान की घोषणा करते हुए कहा कि इस प्लान को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर का 100 फीसदी सपोर्ट हासिल है. उन्होंने कहा कि दोनों नेता "शुरू से ही हमारे साथ थे. ट्रंप के इस बयान से पाकिस्तान को एक बार फिर से गलतफहमी हो गई है. पाकिस्तान को लगता है कि इंटरनेशनल लेवल पर चौधराहट दिखाने का बड़ा मौका उसके पास है. इसलिए पाकिस्तान में अब ये चर्चा हो रही है कि गाजा में जिस इंटरनेशनल स्टेबलाइजेन फोर्स की तैनाती होने जा रही है क्या पाकिस्तान की सेना उसका हिस्सा बनेगी?
बता दें कि ट्रंप ने गाजा के लिए जिस शांति प्लान की रुप रेखा तैयार की है. उसके तहत गाजा में 72 घंटे में जंग की समाप्ति, बंधकों की वापसी, युद्ध से जुड़े हथियारों का सरेंडर, गाजा में शांति सैनिकों तैनाती और युद्ध से ध्वस्त हो चुके इस शहर का पुनर्निर्माण शामलि है.
गाजा पीस प्लान के ऐलान से पहले पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने वाशिंगटन में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की थी.
आठ मुस्लिम देशों पाकिस्तान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, तुर्की, कतर, मिस्र और जॉर्डन के विदेश मंत्रियों ने ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना का समर्थन किया है. इन देशों ने समझौते को अंतिम रूप देने और लागू करने के लिए वाशिंगटन और सभी पक्षों के साथ रचनात्मक सहयोग का वादा किया है.
बता दें कि ट्रंप ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र से इतर न्यूयॉर्क में एक बैठक के दौरान मुस्लिम नेताओं के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी.
सोमवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से पूछा गया कि क्या पाकिस्तान अपने सैनिकों को पीस कीपिंग फोर्स के बैनर तले गाजा भेजेगा?

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