
क्या बीजेपी से नाराज रहते हैं नितिन गडकरी? इंडिया टुडे कॉनक्लेव में दिया ये जवाब
AajTak
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर अक्सर आरोप लगते हैं कि वह बीजेपी से नाराज चल रहे हैं, और इस तरह की अटकलें तब और तेज हो जाती है जब वह बीजेपी की सभाओं से दूरी बनाते हैं. मुंबई इंडिया टुडे के कॉन्क्लेव में पहुंचे गडकरी ने तमाम सवालों के जवाब दिए.
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को लेकर अक्सर राजनीतिक गलियरों में अटकलें चलती रहती हैं. जब वह बीजेपी के किसी बड़े कार्यक्रमों से दूर रहते हैं तो यह भी पूछा जाता है कि क्या वह पार्टी से नाराज चल रहे हैं? इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में पहुंचे गडकरी ने इसके जवाब में कहा कि वह पार्टी से नाराज नहीं है और वह ऐसा करते भी नहीं हैं.
मसलन, नितिन गडकरी ने बीजेपी की नागपुर सभा से दूरी बना ली थी, जिसपर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पार्टी ने उस दौरान उन्हें कोई जिम्मेदारी दी थी. उन्होंने बताया कि वह उस दौरान जम्मू कश्मीर में थे, जहां पार्टी नेतृत्व के कहने पर वह वहां गए थे और यही वजह थी कि वह सभा में नहीं पहुंच सके.
यह भी पढ़ें: विपक्ष की तरफ से किसने दिया था प्रधानमंत्री बनने का ऑफर? सवाल पर नितिन गडकरी ने दिया ये जवाब
बीजेपी की सभाओं से दूर रहते हैं गडकरी?
बीजेपी मीटिंग से दूर रहने के आरोप पर गडकरी ने कहा, "आप 101 फीसदी झूठ बोल रहे हैं. मैंने जम्मू कश्मीर, हरियाणा और बेंगलुरु की बीजेपी सभाओं में भाग लिया. नागपुर की एक मीटिंग में नहीं आ सका क्योंकि जम्मू में तीन-चार सभाएं थीं."
लोकसभा चुनाव के दौरान नागपुर लोकसभा सीट के निरीक्षण पर गडकरी ने कहा, "देवेंद्र फडणवीस भी चुनाव लड़ रहे हैं, और उनके सीट का भी निरीक्षण किया गया है. बीजेपी में ऐसा ही होता है. इसकी रिपोर्ट नेतृत्व के पास जाती है और फिर फैसले होते हैं."

आज सबसे पहले आपको ये बताएंगे कि हाफ सीजफायर' के बाद अमेरिका की बातचीत ईरान के किस Respected Leader से चल रही है. डोनाल्ड ट्रंप बार-बार इस बात का दावा कर रहे हैं. लेकिन आज ईरान ने पूछा है कि वो Respected Leader कौन है. और Respected Leader से बातचीत चल रही है तो पाकिस्तान के जरिये 15 शर्तों का प्रस्ताव क्यों भेजा है. उससे भी बड़ी बात ये है कि ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को कूड़ेदान में फेंकते हुए सुपर पावर अमेरिका को अपनी शर्तें बता दी हैं. और कहा है कि सीजफायर छोड़ो, अब ईरान तभी रुकेगा जब अमेरिका उसकी 5 शर्तें मानेगा. इन शर्तों में ईरान ने कहा कि उसे युद्ध में हुए नुकसान का पूरा हर्जाना मिलना चाहिए. ईरान की टॉप लीडरशिप पर हमले बंद होने चाहिए, सारे प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए. ईरान को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का कानूनी अधिकार मिलना चाहिए.

आज विशेष में बात इजरायल की. जहां ईरान के हमलों की इंटेंसिटी बढ़ी हुई है. ईरान लगातार इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन से अटैक कर रहा है. लेकिन इजरायल ने अपना सिस्टम ही ऐसा डेवेलप किया हुआ है कि ईरान के भीषण हमलों के बाद भी इजरायल में इतना नुकसान नहीं हो रहा है. भले ही ईरान के हमलों में इमारतें तबाह हो रही हों, गाड़ियों की क्षति हो रही हो. लेकिन लोगों की जान बची हुई है. इजरायल ने कैसे ईरान के हमलों से बचने की तैयारी की हुई है.

सीजेआई सूर्यकांत एक मामले की सुनवाई के दौरान उस वक्त नाराज हो गए, जब याचिकाकर्ता निखिल कुमार पुनिया के पिता ने CJI के भाई को फोन कर दिया. मामला बौद्ध धर्म अपनाकर अल्पसंख्यक आरक्षण मांगने से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे 'नए तरह का धोखा' बताते हुए जांच के आदेश दे चुका है. सीजेआई ने इसे गंभीर कदाचार मानते हुए अवमानना की चेतावनी दी.










