
क्या पहली बार कोई महिला बनेगी बीजेपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष? पार्टी को नड्डा के विकल्प की तलाश
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बीजेपी के लिए यह वक्त काफी अहम है क्योंकि पार्टी फिलहाल पीढ़ीगत बदलाव की ओर देख रही है. बहुत कम लोग इस बात से असहमत होंगे कि बीजेपी अब अपने चरम पर है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में लगातार तीसरा कार्यकाल है, साथ ही बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में है.
तीन राज्यों में मिली चुनावी जीत से उत्साहित बीजेपी ने जेपी नड्डा के उत्तराधिकारी के रूप में पार्टी के नए पार्टी अध्यक्ष की तलाश अब नए सिरे से शुरू कर दी है. बीजेपी अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है, लेकिन नड्डा 2019 से ही इस पद पर हैं. वह एक के बाद एक विस्तार पाते रहे, आखिरी विस्तार 2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारियों में निरंतरता बनाए रखने के लिए किया गया था. लेकिन अब अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया में देरी हो रही है.
राजनीतिक चरम पर बीजेपी
बीजेपी सूत्रों का कहना है कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पार्टी नेतृत्व 2024 के सेकंड हाफ में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों पर फोकस कर रहा था. एक समस्या यह भी है कि पार्टी अध्यक्ष के अलावा पिछले जून से नड्डा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के रूप में दोहरी भूमिका निभा रहे हैं, जो बीजेपी के 'एक व्यक्ति एक पद' नियम का उल्लंघन है. बीजेपी के लिए यह वक्त काफी अहम है क्योंकि पार्टी फिलहाल पीढ़ीगत बदलाव की ओर देख रही है. बहुत कम लोग इस बात से असहमत होंगे कि बीजेपी अब अपने चरम पर है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में लगातार तीसरा कार्यकाल है, साथ ही बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में है.
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बीजेपी नेतृत्व अपने वैचारिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शीर्ष नेतृत्व के साथ विचार-विमर्श का एक और दौर शुरू कर सकता है, लेकिन दोनों पक्षों का कहना है कि 'मोदी का फैसला अंतिम होगा'. ऐसा माना जाता है कि लोकसभा चुनावों में हार के बाद से चुनाव प्रबंधन में संघ की साफ भागीदारी ने ही बीजेपी के लिए जीत का एक दौर सुनिश्चित किया है. इसके कारण जिला, मंडल और कई मामलों में राज्य इकाई प्रमुख नियुक्तियों के लिए उनकी सिफारिशों पर सक्रिय रूप से विचार किया गया है. संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक ने इंडिया टुडे को बताया कि वे इस बात को लेकर चिंतित नहीं हैं कि पार्टी अध्यक्ष कौन बनेगा, वे कहते हैं, 'चाहे कोई भी हो, हमारे पास उनके साथ काम करने का कौशल है'.
स्टेट यूनिट में आपसी गुटबाजी

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