
क्या कोई भी देश अपना नया नक्शा निकालते हुए दूसरे की जमीन हड़प सकता है, मैप में कैसे दिखते हैं विवादित इलाके?
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चीन ने कुछ रोज पहले अपना आधिकारिक नक्शा जारी किया, जिसमें भारत के अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन उसके देश में शामिल दिख रहे हैं. ऐसी हरकत उसने तब की, जब हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात दक्षिण अफ्रीका में हुई. इस बीच ये बात उठ रही है कि क्या कोई देश कभी भी नक्शा बनाते हुए दूसरे देशों की जमीन को अपना बता सकता है.
चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने ट्विटर (अब एक्स) पर एक पोस्ट शेयर की, जिसके बाद से बवाल मचा हुआ है. पोस्ट में चीन के जिस नए ऑफिशियल मैप का जिक्र है, उसमें भारत का अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन भी चीन का हिस्सा दिख रहे हैं. नए नक्शे में भारत के हिस्सों के अलावा चीन ने ताइवान और विवादित दक्षिण चीन सागर को भी चीनी क्षेत्र में शामिल किया. ये नया मैप वहां की नेचुरल रिसोर्स मिनिस्ट्री ने निकाला है. इसके बाद से चीन के विस्तारवादी मंसूबों पर भारत समेत कई देश भड़के हुए हैं.
पहला नक्शा किसने बनाया, इसपर विवाद वैसे शुरुआत हजारों साल पहले ही हो चुकी थी. तब गुफाओं में रहते हमारे पूर्वज अपने आसपास जंगल-नदियों या किसी तरह के खतरे को गुफा की दीवारों पर उकेरा करते. 6100 ईसापूर्व एनातोलिया (अब तुर्की) में गुफाओं पर कुछ पेंटिंग्स हैं, जिनके बारे में दावा किया जाता है कि असल में नक्शा है.
15वीं सदी में आधिकारिक नक्शा तैयार हुआ
ऑफिशियल तौर पर पहला मैप 15वीं सदी के मध्य में इटली में बनाया गया. चमड़े पर बने नक्शे को प्लेनस्फरो कहा गया. ये लैटिन शब्द है, जिसमें प्लेनस का अर्थ है चपटा और स्फेरस यानी गोल. मैप आज भी इटली के वेनिस शहर के एक म्यूजियम में रखा हुआ है. नक्शा इतना लंबा-चौड़ा है कि खोलकर बिछाया जाए तो कई किलोमीटर में फैल सकता है. चमड़े पर बना होने के कारण ज्यादातर हिस्से खराब हो चुके और नक्शा बस नाम का ही बाकी है.
खोजना यानी शासक बनना दुनिया खोजने और नक्शे बनाने में पुर्तगाल और इटली का काफी काम रहा. साल 1492 में इटैलियन सैलानी क्रिस्टोफर कोलंबस जब अपनी पहली समुद्री यात्रा पर निकले तो उन्होंने भारत का जिक्र सुना रखा था. इसे ही खोजते हुए वे सैन सेल्वाडोर (अब बहामास) पहुंच गए. हैती और डॉमिनिकन रिपब्लिक की खोज का श्रेय भी कोलंबस को जाता है. मजे की बात ये है कि खोजते हुए सैलानी जहां पहुंचते, वापसी के बाद अपने देश की सेना लेकर वहां आ धमकते और नई जमीन पर कब्जा कर लेते.
बाद में एटलस बना. नक्शों की प्रिटिंग होने लगी. तमाम देश खोजे जा चुके थे. कब्जे और आजादी की लड़ाइयां हो चुकी थीं. अब लगभग तय हो चुका है कि किस देश का नक्शा कैसा दिखता है, उसमें कहां तक का हिस्सा शामिल है.

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