
क्या इजरायल और हिजबुल्लाह में सीजफायर के बाद गाजा में भी आएगी शांति, युद्धविराम का वक्त खत्म होने पर क्या होगा?
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लेबनान के चरमपंथी गुट हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच सालभर से ज्यादा समय से जारी लड़ाई रुक चुकी है. बुधवार से सीजफायर प्रभावी हो गया. अब हिजबुल्लाह साउथ लेबनान से अपने लड़ाकों को हटा लेगा, वहीं इजरायली सैनिक भी पीछे हटेंगे. जानें, क्या है UN का वो रिजॉल्यूशन, जिसकी मदद से ये किया जा सका. और क्या इसके बाद गाजा में भी युद्धविराम हो सकता है?
बुधवार सुबह से इजरायल और लेबनान के मिलिटेंट समूह हिजबुल्लाह के बीच सीजफायर हो चुका. UNSC रिजॉल्यूशन के तहत आई इस शांति की खास बात ये है कि सीजफायर सिर्फ 60 दिनों के लिए है. इस मियाद के दौरान दोनों पक्ष अपनी-अपनी तरफ से शांति की कोशिश करेंगे. लेकिन क्या ये वक्त खत्म होते ही मिडिल ईस्ट फिर अशांत हो सकता है?
पहले समझ लें थोड़ा बैकग्राउंड
पिछले साल 7 अक्टूबर को एक्सट्रीमिस्ट समूह हमास ने एक हमले में हजारों इजरायली नागरिकों की जान ले ली, और ढाई सौ से ज्यादा को अगवा कर लिया. गाजा में बसे इस गुट की ऐसी हरकत के बाद इजरायल ने भी हमला बोल दिया और मिडिल ईस्ट में लगी ये चिंगारी आगे फैलती ही चली गई. इसमें लेबनान का चरमपंथी समूह हिजबुल्लाह भी शामिल हो गया, जो हमास की विचारधारा को सपोर्ट करता है. हमास और इजरायल के बीच तो अनाधिकारिक तौर पर जंग अब भी जारी है लेकिन हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच दो महीनों का सीजफायर हो चुका.
युद्धविराम, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के 1701 रिजॉल्यूशन पर आधारित है. यूएनएससी यह प्रस्ताव साल 2006 में लेकर आई थी, जिसका अकेला मकसद हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच तनातनी को कम करना है. साथ ही ये बफर जोन में स्थाई सीजफायर की बात भी करता है.
ये वो साल था, जब हिजबुल्लाह ने तीन इजरायली सैनिकों की हत्या कर दी थी और दो को अगवा कर लिया था. इससे भड़के इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर कब्जा कर लिया ताकि चरमपंथी गुट को कमजोर किया जा सके. बता दें कि दक्षिणी हिस्से में ही हिजबुल्लाह का हेडक्वार्टर है. अब इस जगह से दोनों को ही हटने कहा गया है और लेबनानी सेना वहां रहते हुए ये सुनिश्चित करेगी कि युद्धविराम पूरी तरह से लागू हो सके.

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