
कौन है बांग्लादेश में 'हसीना हटाओ' आंदोलन का मुख्य चेहरा, ढाका यूनिवर्सिटी से कर रहा पढ़ाई
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सरकारी नौकरी में आरक्षण के लिए शुरू हुए आंदोलन ने ऐसा मोड़ लिया कि प्रधानमंत्री हसीना शेख को अपना देश छोड़ना पड़ गया. इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे छात्र नेता नाहिद इस्लाम. पुलिस ने उनको हिरासत में भी लिया लेकिन जेल से छूटने के बाद उन्होंने अपने आंदोलन को तेज कर दिया, अब उनकी मांग है कि अगले 24 घंटे में अंतरिम सरकार का गठन किया जाए. आइए जानते हैं छात्र नेता नाहिद इस्लाम कौन हैं.
बांग्लादेश में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. सड़कों पर खून-खराबा मचा हुआ है. सोमवार को ढाका समेत पूरे देश में 135 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है. राजधानी ढाका में हालात बेकाबू हो गए हैं. इन कारणों की वजह से शेख हसीना को अपना देश छोड़ना पड़ा है और इसके पीछे छात्र नेता नाहिद इस्लाम और उनके साथियों का हाथ बताया जा रह है.
बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के पीछे की वजह जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई है. पिछले 2 सालों में बांग्लादेश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में इस्लामिक छात्र शिविर के कई कैडर भर्ती हुए हैं. यहीं से विश्वविद्यालय के छात्रों को भड़काने का काम शुरू किया गया. आरक्षण के खिलाफ पिछले दो महीनों से सड़कों पर धरना-प्रदर्शन कर रहे छात्र इस्लामिक छात्र संगठन के ही थे. इन संगठनों में तीन मुख्य चेहरों के कारण ही हसीना शेख ने अपना वतन छोड़ने को मजबूर हुई हैं. आइए जानते हैं नाहिद इस्लाम कौन है.
सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लिए शुरू हुआ था 'हसीना हटाओ' अभियान
अक्सर माथे पर बांग्लादेशी झंडा बांधे सार्वजनिक रूप से देखे जाने वाले नाहिद इस्लाम ढाका यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र के छात्र हैं, नाहिद मीठा बोलते हैं. उनकी नेतृत्व क्षमता ही है कि लगातार 15 साल सत्ता में रहने के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. सरकारी नौकरी में आरक्षण को लेकर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व 26 वर्षीय नाहिद इस्लाम ने कुछ दिन पहले ही छात्र आंदोलन शुरू किया था. इस अभियान को बाद में 'हसीना को हटाओ' अभियान में बदल दिया गया था. जुलाई के मध्य में पुलिस ने उन्हें और ढाका विश्वविद्यालय के कुछ अन्य छात्रों को हिरासत में लिया, जिसके बाद लोग उन्हें जानने लगे. इन लोगों का यह विरोध प्रदर्शन घातक हो गया था.
बांंग्लादेश के लिए ऐतिहासिक दिन
नाहिद इस्लाम साल 1998 में ढाका में पैदा हुए थे. वे शादीशुदा हैं और उनका एक छोटा भाई नाकिब है. उनके पिता एक शिक्षक हैं और उनकी मां एक गृहिणी हैं. छोटे भाई नाकिब ने अपने भाई नाहिद इस्लाम को लेकर कहा कि देश को बदलने की जरूरत है, उन्हें पुलिस ने उठाया, बेहोश होने तक प्रताड़ित किया और फिर सड़क पर फेंक दिया. इन सबके बावजूद, वे संघर्ष कर रहे हैं. हमें विश्वास है कि वे हार नहीं मानेंगे. हमें उन पर गर्व है. कॉर्नेल विश्वविद्यालय में सरकार की एसोसिएट प्रोफेसर सबरीना करीम, जो राजनीतिक हिंसा का अध्ययन करने में माहिर हैं उन्होंने सोमवार को बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक दिन बताया.

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