
कोविड-19: दो राज्यों में कर्मचारियों को टीकाकरण के बाद ही मिलेगा वेतन
The Wire
असम सरकार ने अपने सभी विभागीय प्रमुखों को निर्देश दिया कि इस महीने से वेतन जारी करने के पहले फ्रंटलाइन कर्मचारियों के टीकाकरण की स्थिति का पता लगाएं. इसी तरह मध्य प्रदेश के उज्जैन में ज़िला प्रशासन ने कहा है कि यदि सरकारी कर्मचारियों ने टीका नहीं लगवाया तो उन्हें अगले माह से वेतन नहीं मिलेगा.
गुवाहाटी/उज्जैन: असम सरकार ने बुधवार को अपने सभी विभागीय प्रमुखों को निर्देश दिया कि वे इस महीने से वेतन जारी करने के पहले अग्रिम पंक्ति के सरकारी कर्मचारियों के टीकाकरण की स्थिति का पता लगाएं. असम के मुख्य सचिव जिष्णु बरुआ ने असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष के तौर पर एक आदेश में कहा कि यह देखा गया है कि अग्रिम पंक्ति के कई सरकारी कर्मचारियों ने अभी तक कोविड टीका नहीं लगवाया जबकि कोविन पोर्टल पर उनका पंजीकरण हो चुका है. यह आदेश राज्य प्रशासन के इस बयान के दो दिन बाद आया है कि सरकारी और निजी उद्यमों के ऐसे सभी कर्मचारियों के लिए कार्यालय आना अनिवार्य है जिन्होंने टीकों की दोनों खुराक ली है. बुधवार को जारी आदेश में कहा गया है कि अग्रिम पंक्ति के सरकारी कर्मचारियों का टीकाकरण नहीं होने से वायरस के और फैलने की आशंका बढ़ सकती है और इससे आम नागरिकों, खासकर कमजोर समूहों जैसे शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और अन्य के लिए खतरा पैदा हो सकता है.
यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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