
केशव प्रसाद मौर्य के राजनीतिक प्रोमोशन का समय क्या नजदीक आ गया है?
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ये कोई ढंकी छुपी बात नहीं है कि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य लगातार अपनी बड़़ी भूमिका के लिए प्रयासरत रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ विवादों का आधार भी यही कारण रहा है. पर जिस तरह इधर कुछ दिनों से उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर महत्व मिला है उससे उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म होना लाजिमी है.
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आस-पास आजकल पहले के मुकाबले भीड़ बढ़ गई है. जबसे उन्हें बिहार में विधानमंडल दल का नेता चुनने के लिए पर्यवेक्षक बनाए जाने की खबर आई है उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में उनकी पूछ बढ़ गई है. वैसे भी पिछले 8 साल से लगातार डिप्टी सीएम की पोस्ट पर हैं और केंद्र में कई पावरफुल शक्तियों के वो संपर्क में रहते हैं. कुछ महीनों पहले लखनऊ के एक कार्यक्रम में गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें अपना मित्र बताया था. जाहिर है कि आज कल उनके सितारे चमक रहे हैं.
ऐसे समय में जब साफ दिख रहा है कि भारतीय जनता पार्टी अब ब्राह्मण बनियों की पार्टी से इतर ओबीसी डॉमिनेंट पार्टी में बदलती जा रही है तो यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा कि केशव प्रसाद मौर्य के दिन फिरने वाले हैं. हां यह बात अलग है कि वो किस तरह का होगा. क्या उत्तर प्रदेश में ही उन्हें कोई नई महत्वपूर्ण भूमिका मिलने वाली है या अब उन्हें राष्ट्रीय भूमिका में पार्टी ले जाने वाली है. आइये देखते हैं कि केशव प्रसाद मौर्य के प्रमोशन की उम्मीद क्यों बढ़ रही है?
2027 में यूपी की जीत में केशव की भूमिका अहम
केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश में बीजेपी के ओबीसी चेहरा हैं. 2017 में जब विधानसभा चुनाव हुआ तो केशव उत्तर प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष होते थे. पर जब मुख्यमंत्री बनाने की बात आई तो योगी आदित्यनाथ को मौका मिल गया. पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बढ़िया पर्फार्मेंस दिखाने के बावजूद 2022 में 2017 के मुकाबले पार्टी की सीटें घट गईं. इतना ही नहीं 2024 लोकसभा चुनावों में तो बीजेपी को केवल 34 सीट ही मिल सकी. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण OBC वोटों में गिरावट माना गया. जाहिर है कि 2027 में एक बार फिर बीजेपी को 2017 जैसी अपेक्षित सफलता चाहिए तो मौर्य जैसे नेता को महत्व देना होगा.
बिहार चुनावों में उनकी महती भूमिका
भारतीय जनता पार्टी के लिए बिहार का चुनाव जीतना बहुत जरूरी था. केशव प्रसाद मौर्य को बीजेपी संगठन की ओर से बिहार चुनाव में सह-प्रभारी की भूमिका दी गई थी.मौर्य ने बिहार में NDA की प्रचंड जीत में OBC-EBC वोटबैंक को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई. मुजफ्फरपुर-दरभंगा जैसे जिलों में 50 से अधिक रैलियां करके उन्होंने बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने में कारगर साबित हुए. उनकी जाति (कुर्मी) बिहार के गैर यादव ओबीसी को बीजेपी के पक्ष में करने के लिए कारगर साबित हुई.

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