
केंद्र ने साल 2015 से हज़ारों करोड़ रुपये सीधे गुजरात की कंपनियों के खाते में ट्रांसफर किए: कैग
The Wire
कैग ने कहा कि ऐसा करना साल 2014 के केंद्र सरकार के उस फ़ैसले का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया था कि भारत सरकार अपनी योजनाओं के लिए राशि सीधे राज्य सरकार के खाते में भेजेगी, जिसे राज्य के बजट के ज़रिये ख़र्च करना होता है.
नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा गुजरात में विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों को फंड देने की राशि में साल 2015 से 350 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट से जानकारी सामने आई है.
कैग की 31 मार्च, 2020 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए राज्य वित्त आडिट रिपोर्ट को मंगलवार को गुजरात विधानसभा में रखा गया. यह दो दिन के मानसून सत्र का आखिरी दिन भी था.
कैग ने कहा कि केंद्र ने ये फंड सीधे एजेंसियों को भेजे हैं और यह गुजरात सरकार के बही-खाते में दिखाई नहीं देता है. उन्होंने कहा कि यह साल 2014 के केंद्र सरकार के उस फैसले का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया था कि भारत सरकार अपनी योजनाओं के लिए राशि सीधे राज्य सरकार के खाते में भेजेगी.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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