
केंद्र ने मानी किसानों की 3 मांगें, MSP पर नहीं बनी बात, दिल्ली की सीमाओं पर कड़ा पहरा
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किसानों का दिल्ली चलो मार्च मंगलवार से शुरू होने जा रहा है. इस प्रदर्शन में देश के अलग-अलग हिस्सों के 200 से ज्यादा किसान संगठनों के इसमें शामिल होने की बात कही जा रही है. राजधानी दिल्ली में सुरक्षा चाकचौबंद कर दी गई है. प्रशासन ने महीनेभर के लिए धारा-144 भी लागू कर दी है.
दिल्ली कूच को तैयार किसानों की आज केंद्र सरकार के मंत्रियों से बातचीत हुई. इस बातचीत के दौरान सरकार और किसान संगठनों के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति भी बनी है. चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अर्जुन मुंडा की किसान संगठनों से सोमवार को अहम बातचीत हुई. कई घंटों तक चली इस बैठक में सरकार ने किसानों की कुछ मांगों को मान लिया है. सूत्रों की मानें तो सरकार बिजली अधिनियम 2020 रद्द करने को तैयार हो गई है. इसके अलावा यूपी के लखीमपुर खीरी में मारे गए किसानों को मुआवजा भी दिया जाएगा. साथ ही किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मामले वापस होंगे. हालांकि गंभीर अपराध से जुड़े मामले चलते रहेंगे.
MSP गारंटी कानून पर अभी सरकार और किसानों के बीच सहमति नहीं बनी है. केंद्र सरकार ने MSP के मुद्दे पर हाईपॉवर कमेटी बनाने और उसमें किसान नेताओं को भी शामिल करने का और टाइम बाउंड रखने का भरोसा दिया. इस पर किसानों ने केंद्र सरकार की बात मानने से इनकार किया और कहा कि MSP के मुद्दे पर केंद्र सरकार को तुरंत ही कोई ठोस ऐलान करना होगा. केंद्र सरकार ने कहा कि दालों की एमएसपी को लेकर गारंटी की बात पर तुरंत विचार हो सकता है, लेकिन बाकी फसलों के लिए एमएसपी की गारंटी के लिए केंद्र सरकार को संशोधन के लिए कुछ वक्त चाहिए.
अब आपको बताते हैं कि सरकार और किसानों के बीच इन मांगों पर बातचीत हो रही है. किसान मजदूर मोर्चा (KMM) और संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के मांग पत्र के मुताबिक,
1) सभी फसलों की खरीद पर MSP गारंटी अधिनियम बनाया जाए. डॉ स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश पर सभी फसलों के उत्पादन की औसत लागत से पचास फीसदी ज्यादा एमएसपी मिले.
1.1) गत्ते का एफआरपी और एसएपी स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के अनुसार दिया जाना चाहिए, जिससे यह हल्दी सहित सभी मसालों की खरीद के लिए एक राष्ट्रीय प्राधिकरण बन जाए.
2) किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ हो.

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