
कूरियर से बिहार भेजते थे हरियाणा की शराब, पेंट की बाल्टियों में लकड़ी का बुरादा भरकर छिपाते थे, 360 बोतल जब्त
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निरंतर पूछताछ पर आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे इस कूरियर कंपनी में 20,000 रुपये प्रति माह के वेतन पर काम करते हैं. दोनों आरोपियों ने बताया कि वे अब्दुल नाम के शख्स के निर्देशों का पालन कर रहे थे, जो कूरियर कंपनी का सुरक्षा प्रभारी है.
दिल्ली के शाहदरा जिले के स्पेशल स्टाफ ने तस्करों के एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो कूरियर से हरियाणा की शराब बिहार भेजते थे. पुलिस ने इस संबंध में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो उत्तर-पूर्वी दिल्ली में अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं. मुनेश कुमार (40) ईस्ट गोकल पुर की अमर कॉलोनी में रहता है और सुनील कुमार (32) शाहदरा के न्यू संजय अमर कॉलोनी के रहने वाला है.
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हरियाणा मार्का अंग्रेजी शराब की 360 बोतलें बरामद की हैं. शाहदरा जिला पुलिस को इनके सरगना अब्दुल की तलाश है. पूरे सिंडिकेट के मकसद का पता लगाने के लिए मामले की आगे की जांच की जा रही है. पुलिस के मुताबिक उनकी टीम को गुप्त सूचना मिली कि बी-19, झिलमिल औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक कूरियर कंपनी 'डेल्हीवरी लिमिटेड' दूसरे राज्य यानी बिहार में अवैध शराब की तस्करी में शामिल है.
हरियाणा की 360 बोतल अंग्रेजी व्हिस्की बरामद
पुलिस के मुताबिक इस गुप्त जानकारी को और उनकी टीम ने गहराई से वेरिफाई किया. इसके अलावा, शाहदरा जिले के स्पेशल स्टाफ की टीम को 'डेल्हीवरी लिमिटेड' के गोदाम की त्वरित रेकी करने के लिए तैनात किया गया. इसके बाद, मुनेश कुमार और सुनील को 360 बोतल अंग्रेजी व्हिस्की ('केवल हरियाणा में बिक्री के लिए' स्टैम्प) के साथ पकड़ा गया. आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने के बाद जीटीबी एन्क्लेव थाने में उत्पाद शुल्क अधिनियम की धारा 33 के तहत उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और अवैध शराब जब्त की गई.
निरंतर पूछताछ पर आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे इस कूरियर कंपनी में 20,000 रुपये प्रति माह के वेतन पर काम करते हैं. दोनों आरोपियों ने बताया कि वे अब्दुल नाम के शख्स के निर्देशों का पालन कर रहे थे, जो कूरियर कंपनी का सुरक्षा प्रभारी है. वे अब्दुल के निर्देश पर अवैध शराब की खेप लोड/अनलोड करते थे. उन्होंने बताया कि अवैध शराब को पेंट की बाल्टियों में लकड़ी के बुरादे के बीच छिपाकर रखा जाता था और बाल्टी सील कर दी जाती थी.

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