
कुलभूषण जाधव के साथ फिर हुई PAK में नाइंसाफी, सुप्रीम कोर्ट में शाहबाज सरकार ने भी माना
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कुलभूषण जाधव को मार्च 2016 में बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया था. 2017 में पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने उन्हें जासूसी के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई. पाकिस्तान ने दावा किया कि जाधव RAW (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) के एजेंट हैं और वे बलूच विद्रोहियों के साथ काम कर रहे थे. वहीं भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि 'जाधव ईरान में व्यापार के सिलसिले में गए थे.
भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव पाकिस्तान की जेल में जासूसी के आरोप में बंद हैं. 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के फैसले के बाद उन्हें काउंसलर एक्सेस (राजनयिक पहुंच) तो मिला लेकिन उच्च अदालत में अपील का अधिकार नहीं दिया गया. पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' की एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है.
आईसीजे का फैसला कुलभूषण जाधव को उच्च अदालत में अपील का अधिकार नहीं दिला सका यानी उन्हें सैन्य अदालत के फैसले को चुनौती देने का पूरा अवसर नहीं दिया गया. यह बयान पाकिस्तान के रक्षा मंत्रालय के वकील ने पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को दिया.
कोर्ट के सवाल पर रक्षा मंत्रालय ने दी सफाई
यह सुनवाई उन पाकिस्तानी नागरिकों के मामलों से जुड़ी थी जिन्हें 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद हुए दंगों में कथित भूमिका के लिए सैन्य अदालतों ने दोषी ठहराया था. जब कोर्ट ने पूछा कि क्या अपील के अधिकार की यही सुविधा जाधव को भी प्रदान की गई थी और सैन्य अदालतों में दोषी ठहराए गए पाकिस्तानी नागरिकों को यह सुविधा क्यों नहीं दी गई, तो रक्षा मंत्रालय के वकील ने इस पर जवाब दिया.
पाकिस्तान ने किया वियना संधि का उल्लंघन
वकील ने माना कि पाकिस्तान ने वियना संधि (Vienna Convention on Consular Relations) के अनुच्छेद 36 का उल्लंघन किया था, जिसमें यह प्रावधान है कि किसी देश के नागरिक को अगर किसी अन्य देश में गिरफ्तार किया जाए, तो उसे अपने देश के दूतावास से संपर्क, मुलाकात और कानूनी मदद लेने का अधिकार होता है.

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