
कार्यकर्ता रोना विल्सन को 10 सालों के साइबर जासूसी प्रयासों के बाद निशाना बनाया गयाः रिपोर्ट
The Wire
साइबर सिक्योरिटी फर्म सेंटिनलवन के अमेरिकी विशेषज्ञों के निष्कर्ष बताते हैं कि एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार सामाजिक कार्यकर्ता रोना विल्सन को एक दशक के लंबे प्रयास के बाद निशाना बनाया गया. इससे पहले डिजिटल फॉरेंसिक फर्म आर्सेनल कंसल्टिंग ने विल्सन के ख़िलाफ़ पेश इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का अध्ययन करने के बाद कहा था कि उनके आईफोन में पेगासस के साक्ष्य मिले थे.
नई दिल्लीः एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि एल्गार परिषद में मामले में गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ता रोना विल्सन को दो समूहों ने निशाना बनाकर उनके सिस्टम की हैकिंग की थी.
यह नई रिपोर्ट पिछले साल मैसाचुसेट्स स्थित डिजिटल फॉरेंसिक फर्म आर्सेनल कंसल्टिंग की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें कहा गया कि एक साइबर हमलावर ने रोना विल्सन की गिरफ्तारी से कम से कम 22 महीने पहले उनके कंप्यूटर में सेंधमारी की और हैकिंग के जरिये उनके कंप्यूटर में 10 आपत्तिजनक पत्र प्लांट किए.
इस साल जुलाई महीने में पेगासस प्रोजेक्ट के तहत द वायर ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि पेगासस के जरिये जिन लोगों को सबसे पहले निशाना बनाया गया, उनमें विल्सन भी थे.
वह एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक हैं.

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बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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