
'कांग्रेस अयोध्या के न्योते की हकदार नहीं...', राम मंदिर उद्घाटन का निमंत्रण ठुकराने पर बरसे CM हिमंता
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हिमंता ने कहा कि जैसा पंडित नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के साथ किया था. अब ठीक वैसा ही कांग्रेस नेतृत्व ने राम मंदिर के साथ भी किया. इतिहास उन्हें हिंदू विरोधी पार्टी के रूप में आंकता रहेगा.
अयोध्या में राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में कांग्रेस नेता शामिल नहीं होंगे. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के इस फैसले पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अयोध्या के निमंत्रण की "हकदार" नहीं थी. लेकिन इसे अस्वीकार करके कांग्रेस ने 'अपने कुछ पापों को धोने का एक सुनहरा अवसर' खो दिया है.
हिमंता ने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही राम मंदिर के खिलाफ अपने विचारों के लिए हिंदू समाज से माफी मांग सकती थी. लेकिन कांग्रेस ने इस मौके को गंवा दिया. उन्होंने कहा कि मेरी राय में शुरुआत से ही राम मंदिर के खिलाफ अपने विचारों के लिए कांग्रेस इस तरह के निमंत्रण की हकदार नहीं थी. इस न्योते को स्वीकार करके वे प्रतीकात्मक रूप से हिंदू समाज से माफी मांग सकते थे. हिमंता ने कहा कि जैसा पंडित नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के साथ किया था. अब ठीक वैसा ही कांग्रेस नेतृत्व ने राम मंदिर के साथ भी किया. इतिहास उन्हें हिंदू विरोधी पार्टी के रूप में आंकता रहेगा. कांग्रेस के यह कहने के बाद कि उसका शीर्ष नेतृत्व राम मंदिर कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा. हिमंता ने अफगानिस्तान में बाबर के मकबरे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की एक पुरानी तस्वीर शेयर की और पूछा कि गांधी परिवार "हिंदुओं से नफरत" क्यों करता है. उन्होंने कहा कि गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों ने इस स्थल का दौरा किया. साथ ही राम लला के प्रति उनकी नफरत पर सवाल उठाया.
कांग्रेस ने एक बयान जारी कर कहा था कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और अधीर रंजन को 22 जनवरी को राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता मिला था. चूंकि यह बीजेपी और आरएसएस का इवेंट है और चुनावी लाभ के लिए अधूरे मंदिर का उद्घाटन किया जा रहा है. इसलिए कांग्रेस पार्टी न्योते को सम्मान अस्वीकार करती है. कांग्रेस पार्टी से कोई नेता अयोध्या के कार्यक्रम में नहीं जाएगा.

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