
कर्ज, बीमा और साजिश... ऐसे खुला सूरत की डायमंड फैक्ट्री में 32 करोड़ के हीरों की चोरी का राज, हैरान कर देगी कहानी
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सूरत की डायमंड फैक्ट्री से 32 करोड़ के हीरे की चोरी का राज़ खुल चुका है. पुलिस की जांच में सामने आया कि चोर कोई बाहरी बादमाश नहीं, बल्कि इस चोरी की पूरी साजिश कंपनी मालिक और उसके बेटों ने ही रची थी. ये कहानी आपको हैरत में डाल देगी.
Surat Diamond Factory Burglary: गुजरात के सूरत में एक डायमंड फैक्ट्री से 32 करोड़ के हीरे चोरी हो गए. चोरों ने 15, 16 और 17 अगस्त की छुट्टी का फायदा उठाते हुए चोरी की वारदात को अंजाम दिया. इसके बाद पुलिस ने इस हाई प्रोफाइल चोरी के मामले की तफ्तीश शुरू की. जैसे-जैसे तफ्तीश आगे बढ़ रही थी. पुलिस की परेशानी भी बढ़ती जा रही थी, क्योंकि चोर का जो चेहरा सामने आता जा रहा था, वो हैरान करने वाला था. चोरी की ये वारदात आपको भी हैरान कर देगी.
गैस कटर से कटी तिजोरी. टूटे हुए सीसीटीवी कैमरे. बिखरा हुआ सामान. और 32 करोड़ के हीरे गायब. फिर सबसे आख़िर में ग़ज़ब का एंटी क्लाइमेक्स. चोरी की ये कहानी बेहद हैरान करने वाली है. दरअसल, 18 अगस्त की सुबह जब सूरत की कपोदरा पुलिस को चोरी की इस वारदात की खबर मिली, तो उसके भी होश फाख्ता हो गए. ये कोई मामूली चोरी नहीं थी. चोरों ने हीरों की एक फैक्ट्री डीके एंड संस डायमंड कंपनी पर धावा बोल कर पूरे के पूरे 32 करोड़ रुपये के बेशकीमती हीरों पर अपना हाथ साफ कर दिया था. फैक्ट्री मालिक और उसका पूरा परिवार अपने साथ हुए इस भयानक हादसे से सदमे में था और पुलिस पूरी तरह से क्लू लेस थी.
ऐसे में चोरी की खबर मिलते ही सूरत पुलिस का पूरा लवाजमा और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स मौका-ए-वारदात पर पहुंचा. डीके एंड संस डायमंड कंपनी के मालिक देवेंद्र कुमार चौधरी ने पुलिस को जो कहानी सुनाई, वो कुछ यूं थी. चौधरी ने बताया कि 15 अगस्त को वो आखिरी बार अपनी कंपनी में आए थे. और तब उन्होंने रफ और पॉलिश्ड दोनों तरह के हीरे कंपनी की तिजोरी में रखे थे और घर चले गए थे. चूंकि 15 के बाद 16 और 17 अगस्त को भी छुट्टी थी, तो उनके परिवार से या मुलाजिमों में से कोई भी कंपनी की तरफ नहीं आया. लेकिन जब 18 अगस्त की सुबह वो अपनी फैक्ट्री में पहुंचे, तो चोरी की ये वारदात देख कर सन्न रह गए.
पुलिस ने मामले की तफ्तीश मौका-ए-वारदात पर फिंगर प्रिंट इकट्ठा करने से लेकर तमाम तरह के साइंटिफिक इनवेस्टिगेशन से की. लेकिन पुलिस के लिए हर कदम पर अड़चन ही अड़चन थी. क्योंकि एक तो कंपनी में लगे तमाम सीसीटीवी कैमरे चोरों ने तोड़ डाले थे और ऊपर से सीसीटीवी का डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर यानी डीवीआर भी अपने साथ उठा ले गए थे. यानी देखा जाए, तो एक तरह से चोरों तक पहुंचने के सारे के सारे रास्ते बंद थे. लेकिन जब तफ्तीश आगे बढ़ी, तो पुलिस को एक-एक कर कई चौंकाने वाली बातें पता चलीं.
सबसे पहले तो पुलिस ने यही नोटिस किया कि चोरों ने गैस कटर से हीरों वाली तिजोरी तो काट दी थी, लेकिन कंपनी के मेन गेट से लेकर बाकी दरवाज़ों से अंदर आने के लिए उन्होंने कोई बल प्रयोग नहीं किया था. दरवाजों पर लगे तालों को चाबी से ही खोला गया था. यानी कंपनी की बिल्डिंग में फोर्स्ड एंट्री के कोई भी निशान नहीं थे. तो क्या कोई ऐसा था जिन्होंने चोरी के लिए कंपनी में चोरों को इजी एंट्री दे दी थी? ऐसा कोई इनसाइडर यानी भितरघाती ही कर सकता था. कंपनी में लगे फायर अलार्म भी गायब थे.
एक हैरानी की बात ये भी थी कंपनी में इतने कीमती हीरे रखे हुए थे, मगर वहां कोई भी सिक्योरिटी गार्ड नहीं था. जांच हुई तो पता चला कि सिक्योरिटी गार्ड को कुछ रोज पहले ही काम से हटा दिया गया था और किसी दूसरे गार्ड की तैनाती भी नहीं की गई. ये भी एक हैरान करने वाली बात थी. मगर सिर्फ यही दो बातें ऐसी नहीं थी जो पुलिस को उलझा रही थी, पुलिस को इसके बाद एक-एक कर कई और चौंकाने वाले इत्तेफाकों का पता चला.

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