
करगिल में शहीद हुए थे पिता, बेटे ने पुंछ में दिया बलिदान, 3 महीने की बेटी को छोड़ गए कुलवंत सिंह
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जम्मू-कश्मीर के पुंछ में आतंकी हमला हुआ. सेना के 5 जवान शहीद हो गए. अब इन सैनिकों के परिवार से जुड़ी जानकारियां सामने आ रही हैं. अटैक में मोगा के लांस नायक कुलवंत सिंह भी शहीद हुए. उनके पिता ने करगिल की जंग में बलिदान दिया था. ओडिशा के लांस नायक देबाशीष बिस्वाल अपने पीछे 7 महीने की बेटी छोड़ गए हैं.
जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में आतंकी हमले में 5 जवान शहीद हुए. अटैक में मोगा के चाडिक गांव के रहने वाले लांस नायक कुलवंत सिंह ने भी बलिदान दिया. कुलवंत को अपने पिता की ही तरह वीर गति मिली. उनके पिता 1999 में करगिल युद्ध के दौरान शहीद हुए थे. जब कुलवंत के पिता करगिल युद्ध में शहीद हुए, तब कुलवंत की उम्र लगभग दो साल थी. उनकी शहादत के ठीक 11 साल बाद 2010 में कुलवंत सेना में शामिल हुए थे.
लांस नायक कुलवंत सिंह की मां ने एजेंसी को बताया कि उनके बेटे ने घर से जाने के पहले उनसे कहा था,'चिंता करने की जरूरत नहीं है, वह अच्छे से रहेगा.' कुलवंत की 3 साल की बेटी और तीन महीने का एक बेटा है. कुलवंत का परिवार गांव में ही रहता है. गांव के सरपंच गुरचरण सिंह ने बताया कि कुलवंत परिवार का एकमात्र कमाने वाला था. इसलिए सरकार को उसके परिवार की मदद के लिए आगे आना चाहिए.
कुलवंत सिंह के भाई का कहना है कि सरकार और सेना को हमले का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए. उनका भाई अपने परिवार से बहुत प्यार करता था और उसने अपने बेटे का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए उनसे कई बार कहा था. कुलवंत के अलावा सेना के 4 और जवान इस हमले में शहीद हुए हैं. बलिदान देने वाले पांच जवानों में से 4 पंजाब तो वहीं एक ओडिशा के रहने वाले थे.
ओडिशा के शहीद जवान की 7 महीने की बेटी
शहीद जवानों में लांस नायक देबाशीष बिस्वाल ओडिशा के रहने वाले थे. वे पुरी जिले के अलगुम गांव से थे और 2021 में ही उनकी शादी हुई थी. वह अपने पीछे पत्नी के अलावा 7 महीने की बेटी छोड़ गए हैं. 30 वर्षीय बिस्वाल स्थानीय लोगों के बीच लोकप्रिय थे. शहीद जवान के रिश्तेदार दिलीप बिस्वाल ने बताया कि वह देश की सेवा करने के इरादे से सेना में शामिल हुए थे. जब भी वह हमसे मिलने आते थे, वह सामाजिक गतिविधियों में भाग लेते थे और स्थानीय युवाओं के लिए एक प्रेरणा थे.
कुछ घंटे पहले ही की थी परिवार से बात

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