
कब-कब फेल हुई है मोसाद? पता भी नहीं चला और दुश्मन ने खेल कर दिया
AajTak
मिडिल ईस्ट में बढ़ी हलचल है. हालिया घटनाओं जैसे पेजर हमला, नसरुल्लाह पर हवाई हमला, और हमास के कमांडरों पर हमले के पीछे मोसाद का हाथ माना जा रहा है. इस वक्त पूरी दुनिया की नजरें इसराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर टिकी हुई हैं.
मिडिल ईस्ट में हलचल बढ़ी हुई है. हालिया घटनाओं जैसे पेजर हमला, नसरुल्लाह पर हवाई हमला, और हमास के कमांडरों पर हमले के पीछे मोसाद का हाथ माना जा रहा है. इस वक्त पूरी दुनिया की नजरें इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर टिकी हुई हैं. हालांकि, यह सच है कि मोसाद ने कई महत्वपूर्ण और सफल मिशन अंजाम दिए हैं, लेकिन यह एजेंसी हमेशा सफल नहीं रही है.
इतिहास में कई बार ऐसे हालत भी आईं जब मोसाद को असफलता का सामना करना पड़ा और उसे घुटनों पर भी आना पड़ा. आइये जानते हैं मोसाद की फेलियर की कहानी.
खालिद मशाल की कहानी...
खालिद मशाल, हमास के नए नेता के रूप में उभर रहा था. इजरायल के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके थे. साल 1997 में, मोसाद ने उन्हें मारने की साजिश रची. मोसाद के एजेंट जॉर्डन की राजधानी अम्मान में मशाल के ऑफिस के बाहर घात लगाए बैठे थे. प्लान था कि खालिद को जहर का इंजेक्शन देकर उनकी हत्या कर दी जाए. ऐसा उन्होंने कर भी दिया. उसी वक्त खालिद मशाल के सुरक्षा गार्ड ने मोसाद एजेंटों को पकड़ लिया गया.
इस नाकाम हमले की खबर जैसे ही फैली, जॉर्डन के तत्कालीन राजा हुसैन को इतना गुस्सा आया कि उन्होंने इजरायल को साफ चेतावनी दी. राजा हुसैन ने धमकी दी कि अगर इजरायल ने जहर का एंटीडोट नहीं सौंपा, तो वह मोसाद एजेंटों को फांसी पर लटका देंगे. यह धमकी इजरायल के लिए बड़ा सिरदर्द बन गई, और आखिरकार इजरायल को मजबूरी में एंटीडोट देना पड़ा, जिससे खालिद मशाल की जान बचाई जा सकी.
यह घटना दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गई. मशाल की छवि एक मजबूत नेता के रूप में उभर कर सामने आई, जो मोसाद के घातक हमले से भी बच निकले.

सैकड़ों साल पहले तबाह हो चुके एक रोमन शहर की दीवार पर करीब 2000 साल पुराने लव लेटर्स लिखे हुए मिले हैं. यह खोज आज की उन्नत और आधुनिक तकनीक का नतीजा है. क्योंकि, जिस दीवार पर ये ग्रैफिटी बने थे, वो काफी पहले खुदाई में मिल गए थे, लेकिन उन पर उकेरे गए भित्तिचित्रों को समझना मुश्किल था. अब जाकर पुरातत्वविदों को इसका मतलब पता चला है.

Shani Nakshatra Gochar 2026: शनि जब रेवती नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन गहराई से देखने को मिलता है. रेवती नक्षत्र मीन राशि का अंतिम नक्षत्र माना जाता है और इसका स्वामी बुध ग्रह है. इसलिए इस अवधि में सोच-समझ, योजना, संवाद और निर्णय क्षमता से जुड़े मामलों में खास बदलाव दिखाई दे सकते हैं.











