
कनाडा में प्रवासी भारतीयों का अगर मोहभंग हुआ तो!
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प्रवासी भारतीयों के कंधों पर क्यों टिकी है कनाडा की इकॉनमी, राहुल गांधी के मन में राजस्थान को लेकर संशय क्यों बना हुआ है, राजस्थान कांग्रेस पर क्या असर पड़ेगा और जयशंकर ने यूएन असेंबली में क्या क्या कहा? सुनिए 'आज का दिन' में.
भारत और कनाडा के बीच तनाव अपने चरम पर है. और इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं वो लोग जो कनाडा में पढ़ने गए हैं या नौकरी करने. कुछ ऐसे भी थे जो जाने की तैयारी में थे लेकिन अभी इस तनाव के पीड़ित हो गए. लेकिन ये मुसीबत इतनी ही नहीं है बल्कि कनाडा के अंदर भी है. कनाडा इस वक्त हाउसिंग क्राइसिस, महंगाई और नौकरियों के संकट से भी जूझ रहा है. और इस संकट का सबसे ज्यादा शिकार प्रवासी ही हैं.
कनाडा के प्राइवेट कॉलेजों के बाहर भारतीय मूल के बच्चे प्रदर्शन कर रहे हैं कि उन्हें रहने का ठिकाना सुनिश्चित कराया जाए लेकिन उनकी ये समस्या लगभग अनअड्रेस्ड ही है. कुछ रिपोर्ट्स ये भी कह रही हैं कि कनाडाई लोग भारत और कनाडा में बढ़ी तकरार के बाद भारतीयों को रेन्टेड अपार्टमेंट देने से भी झिझक रहे हैं. क्या कह रहे हैं वहाँ के लोग, क्या दिक्कतें आ रही है उन्हे और प्रवासी छात्रों का मोहभंग होता है तो कनाडा पर इसका किस तरह असर होगा? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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बीते रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक मीडिया इवेंट में थे. उनसे इस साल के अंत में 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के बारे में पूछा गया. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में हम सत्ता में आ रहे हैं, तेलंगाना में भी चान्सेस हैं. पर वो एक राज्य के लिए लेकिन लगा गए. ये राज्य है राजस्थान. उन्होंने कहा कि राजस्थान में कांटे की लड़ाई है, थोड़ा मुश्किल है लेकिन हम सत्ता में वापसी कर लेंगे. राहुल ने मुश्किल के ये जो कयास लगाए वो राजनीतिक पंडितों के लिए ये आश्चर्यजनक था क्योंकि कोई भी नेता हमेशा किसी भी चुनाव में जीत का दावा ही करता है. राजस्थान के नेताओं को भी राहुल का ये अनुमान जो लगभग नकारात्मक था वो अच्छा तो नहीं ही लगा होगा, खास कर अशोक गहलोत को जो पिछले एक साल से सत्ता में वापसी का दावा कर रहे हैं. तब जब इंडिया अलायंस की मजबूती का दावा कांग्रेस लगातार कर रही है और अगले ही साल लोकसभा चुनाव भी हैं इसलिए भी राजस्थान में विधानसभा चुनाव के अच्छे नतीजे कांग्रेस के लिए जरूरी हैं ऐसे में एक नेता के तौर पर राहुल गांधी का ये बयान कितना परिपक्व माना जाना चाहिए? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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कनाडा इन दिनों खबरों से नहीं जा रहा. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर कल यूएन हेडक्वार्टर्स में थे. उन्होंने यूएन असेंबली को संबोधित किया. बोला तो उन्होंने कई और मुद्दों पर भी लेकिन कनाडा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक स्वार्थ के चक्कर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव नहीं बढ़ाना चाहिए. जाहिर है उनका इशारा जस्टिन टूडो की तरफ था. इसके अलावा जयशंकर ने ये भी कहा कि अब वो वक्त जा चुका है जब चंद देश केवल अपने एजेंडे के आधार पर पूरी दुनिया को चलाते थे. जयशंकर ने संसद में पास हुए महिला आरक्षण बिल का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा भारत दुनिया में हो रही तरक्की के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रहा है. क्या रहीं जयशंकर के इस सम्बोधन की हाइलाइट्स? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.

पिछले 18 दिनों से अमेरिका, इजरायल और ईरान के युद्ध का मोर्चा खुला हुआ है. और उधर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ जंग का एक और फ्रंट खोल दिया है. बीती रात पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक करके एक अस्पताल के 400 मरीज मार डाले. पाकिस्तान को ये लग रहा है कि जब दुनिया का ध्यान ईरान पर है तो वो अफगानिस्तान में कत्लेआम मचा सकता है. और वो इससे बच जाएगा. लेकिन ऐसा होगा नहीं. क्योंकि अब तालिबान ने भी अपने निर्दोष नागरिकों की हत्या का बदला लेना की कसम खा ली है.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल ने ईरान के अली लारिजानी और बसीज कमांडर को मार गिराया है. उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान की व्यवस्था को कमजोर करना है. नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर सैन्य सहयोग जारी है और आगे भी कई बड़ी योजनाएं तैयार हैं.

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