
एक रिपोर्ट जिसने खोल दिया दिल्ली का शराब घोटाला, सिसोदिया से लेकर अफसर-कारोबारी तक... कैसे नप गए?
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दिल्ली का कथित शराब घोटाला छाया हुआ है. आम आदमी पार्टी में दूसरे नंबर माने जाने वाले मनीष सिसोदिया बुरी तरह फंस चुके हैं. तेलंगाना के सीएम केसीआर की बेटी के. कविता पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. सीबीआई और ईडी कई अफसरों और शराब कारोबारियों को गिरफ्तार कर चुकी है. ऐसे में जानिए दिल्ली के शराब घोटाले की पूरी कहानी क्या है?
तारीखः 22 मार्च 2021. दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया मीडिया के सामने आए. उन्होंने नई शराब नीति का ऐलान किया. उन्होंने बताया कि नई शराब नीति लागू होने के बाद सरकार शराब के कारोबार से बाहर आ जाएगी. अब शराब की दुकानें निजी हाथों में चली जाएंगी. ये ऐलान करते समय दो बड़े तर्क दिए गए. पहला- माफिया राज खत्म होगा. दूसरा- सरकारी खजाना बढ़ेगा.
इसके ठीक 240 दिन बाद यानी 17 नवंबर 2021 को नई शराब नीति यानी एक्साइज पॉलिसी 2021-22 लागू कर दी गई. चूंकि सरकार इस कारोबार से बाहर हो गई थी और सब निजी हाथों में चला गया था, इसलिए शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए जबरदस्त डिस्काउंट दिए गए. शराब की जमकर बिक्री हुई. सरकारी खजाना भी बढ़ा. लेकिन इसका विरोध होने लगा.
8 जुलाई 2022 को दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार ने एलजी वीके सक्सेना को रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट में सिसोदिया पर आरोप लगा कि उन्होंने गलत मकसद के साथ नई शराब नीति तैयार की. लाइसेंसधारी शराब कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया. और तो और कथित तौर पर एलजी और कैबिनेट की मंजूरी लिए बगैर ही शराब नीति में अहम बदलाव भी कर दिए.
मुख्य सचिव की रिपोर्ट के आधार पर एलजी ने सीबीआई जांच की सिफारिश की. 17 अगस्त 2022 को सीबीआई ने केस दर्ज किया. इसमें मनीष सिसोदिया, तीन पूर्व सरकारी अफसर, 9 कारोबारी और दो कंपनियों को आरोपी बनाया गया.
सीबीआई ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. इनमें तीन पूर्व सरकारी अफसर एजी कृष्णा (पूर्व एक्साइज कमिश्नर), आनंद तिवारी (पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्नर) और पंकज भटनागर (पूर्व असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर) शामिल हैं.
इसमें अमित अरोड़ा (बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर), दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे को भी आरोपी बनाया गया है. इन तीनों को सिसोदिया का करीबी माना जाता है. आरोप है कि तीनों ने आरोपी सरकारी अफसरों की मदद से शराब कारोबारियों से पैसा इकट्ठा किया और उसे दूसरी जगह डायवर्ट किया.

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