
'एक दिन में 13 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी', क्या है वो माइनिंग केस, जिसमें अखिलेश को CBI ने बुलाया
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आरोप है कि 2012 से 2016 के दौरान सरकारी अफसरों ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हमीरपुर जिले में खनिजों के अवैध खनन की अनुमति दी थी. इतना ही नहीं, माइनिंग पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के प्रतिबंध के बावजूद अवैध रूप से लाइसेंस को रिन्यू किया गया था.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को सीबीआई ने समन जारी किया है. उन्हें ये समन अवैध खनन मामले में जारी किया गया है. सीबीआई ने इस मामले में अखिलेश को गुरुवार को पूछताछ के लिए बुलाया है. अखिलेश को बतौर गवाह पेश होने के लिए कहा गया है.
सीबीआई ने अखिलेश को दिल्ली स्थित दफ्तर में बुलाया है. इस मामले में सीबीआई ने एफआईआर 2019 में दर्ज की थी, लेकिन ये मामला उस वक्त का है, जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे.
यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान फतेहपुर, देवरिया, शामली, कौशांबी, सहारनपुर, सिद्धार्थनगर और हमीरपुर में अवैध खनन के मामले सामने आए थे. 2 जनवरी 2019 को सीबीआई ने 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था.
आरोप है कि 2012 से 2016 के दौरान सरकारी अफसरों ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हमीरपुर जिले में खनिजों के अवैध खनन की अनुमति दी थी. इतना ही नहीं, माइनिंग पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के प्रतिबंध के बावजूद अवैध रूप से लाइसेंस को रिन्यू किया गया था.
अखिलेश यादव कैसे फंस गए?
2016 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने अवैध खनन से जुड़े मामलों की जांच शुरू की थी. 2019 में सीबीआई ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली के कई इलाकों में तलाशी भी ली थी.

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