
उपहार त्रासदी पर बनी वेब सीरीज हो पाएगी रिलीज? दिल्ली हाई कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
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उपहार सिनेमा त्रासदी पर आधारित नेटफ्लिक्स की ओटीटी वेब सीरीज 'ट्रायल बाय फायर' की रिलीज पर रोक लगाने की अर्जी पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हाई कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. बता दें कि ये वेब सीरीज 13 जनवरी 2023 को रिलीज होने वाली थी.
दिल्ली के उपहार सिनेमा त्रासदी पर आधारित नेटफ्लिक्स की ओटीटी वेब सीरीज 'ट्रायल बाय फायर' की रिलीज पर रोक लगाने की अर्जी पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. उपहार सिनेमा के मालिक और उस अग्निकांड में सजा याफ्ता सुशील अंसल की तरफ से पेश हुए वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि 1997 की उस घटना में 59 लोगों की मौत हो गई थी. इसके अलावा 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. उसमें सुशील अंसल को सज़ा हुई थी. उसे जेल भी जाना पड़ा था. सजा के आदेश को भी चुनौती दी गई है, जिस पर सुनवाई लंबित है.
अंसल के वकील ने कहा कि कोर्ट किताब के उस भाग को भी देखे जिस पर फ़िल्म बनाई गई है. हाई कोर्ट ने कहा कि 2015 में किताब पब्लिश हुई थी और अब आप राहत की मांग कर रहे हैं? हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह कोर्ट के आदेश की आलोचना हो सकती है, लेकिन यह मानहानि का दावा नहीं हो सकता. अंसल के वकील ने कहा कि वेब सीरीज़ में मेरे ऊपर सामूहिक हत्या और हत्या करने का आरोप लगाया गया है. साथ ही ये भी दिखाया गया है कि इसके लिए मैंने कभी माफी भी नहीं मांगी, जबकि सच्चाई इससे काफी अलग है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में मैंने माफी भी मांगी थी.
अंसल ने कहा प्रथम दृष्टया सीरीज में मेरे किरदार का गलत चित्रण किया गया है. नेटफ्लिक्स के वकील ने कहा कि पूरी वेब सीरीज़ 2016 में आई किताब के ऊपर आधारित है. सभी चीज़ पब्लिक डोमेन में हैं. 19 सितंबर 2016 को किताब रिलीज़ हुई थी, 18 दिसंबर 2020 को फ़िल्म बनाने की घोषणा हुई. 8 नवंबर 2021 को मामले में सज़ा का एलान हुआ. अंसल की 7 साल की सज़ा और 225 करोड़ का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया था.
4 जनवरी को जारी हुआ था ट्रेलर
नेटफ्लिक्स के वकील ने कहा कि 14 दिसंबर 2022 को हमने घोषणा की थी कि 13 जनवरी 2023 को वेब सीरीज़ रिलीज़ की जाएगी, लेकिन रिलीज़ से पहले अंतिम समय में इस पर रोक लगाने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की गई है. नेटफ्लिक्स के वकील ने कहा कि 4 जनवरी को ट्रेलर जारी किया गया. उसके बाद भी अंसल ने इस बाबत कोर्ट का रुख नहीं किया. 10 जनवरी को कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों की सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है.
साल 2016 से बाजार में है किताब

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