
उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर की ज़मानत याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
The Wire
सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव बलात्कार मामले के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर की उस याचिका पर सुनवाई करने इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत से जुड़े मामले में अपनी सज़ा और 10 साल की क़ैद को चुनौती दी थी. शीर्ष अदालत ने मामले को दिल्ली हाईकोर्ट कोर्ट वापस भेजते हुए प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई करने का अनुरोध किया है.
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 फरवरी) को उन्नाव बलात्कार मामले के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर की उस अपील को दिल्ली हाईकोर्ट को वापस भेज दिया, जिसमें उन्होंने पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत से जुड़े मामले में अपनी सज़ा और 10 साल की कैद को चुनौती दी है.
शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट से इस मामले की ‘आउट-ऑफ-टर्न’ (प्राथमिकता के आधार पर) सुनवाई करने का अनुरोध किया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि वह इस मामले का फैसला यथाशीघ्र करे, लेकिन किसी भी स्थिति में तीन महीने के भीतर.
सुप्रीम कोर्ट सेंगर की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने 19 जनवरी के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. उस आदेश में हाईकोर्ट ने मौत के मामले में उनकी सज़ा निलंबित करने से इनकार कर दिया था.
इस मामले में पीड़िता का आरोप था कि 3 अप्रैल, 2018 को उनके पिता को कथित तौर पर अवैध हथियार मामले में फंसाया गया और पुलिस द्वारा उन्हें कुलदीप सिंह सेंगर के इशारे पर गिरफ्तार किया गया. कुछ दिनों बाद 29 अप्रैल, 2018 को न्यायिक हिरासत में उनकी मौत हो गई थी.
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मार्च 2020 में पूर्व भाजपा विधायक सेंगर, उनके भाई एवं पांच अन्य को पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत की साजिश रचने का दोषी ठहराया था और उन्हें दस साल की कैद की सजा सुनाई गई थी.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

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