
'उत्तर कोरिया को निशाना बनाया तो...', रूस ने अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया को दी चेतावनी
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यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के जवाब में अपने त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यासों को तेज किया है. शुक्रवार को तीनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप के पास एक संयुक्त एयर ड्रिल की, जिसमें अमेरिका के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बॉम्बर्स ने भी हिस्सा लिया.
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार को उत्तर कोरिया के पूर्वी शहर वोनसान में अमेरिकी नेतृत्व वाले सुरक्षा गठजोड़ पर कड़ी चेतावनी दी. लावरोव ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान को उत्तर कोरिया के खिलाफ किसी भी सैन्य गठबंधन से परहेज करने को कहा. उनका यह बयान उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन से मुलाकात के बाद आया, जहां उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ओर से शुभकामनाएं भी पहुंचाईं.
लावरोव ने उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए सोन हुई के साथ वार्ता के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा, “हम चेतावनी देते हैं कि इन संबंधों का उपयोग किसी भी देश, विशेषकर उत्तर कोरिया या रूस के खिलाफ गठबंधन बनाने के लिए न किया जाए.”
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के जवाब में अपने त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यासों को तेज किया है. शुक्रवार को तीनों देशों ने कोरियाई प्रायद्वीप के पास एक संयुक्त एयर ड्रिल की, जिसमें अमेरिका के परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बॉम्बर्स ने भी हिस्सा लिया.
उत्तर कोरिया इन सैन्य अभ्यासों को हमले की तैयारी के तौर पर देखता है और इसीलिए वह अपने परमाणु हथियारों को आत्मरक्षा का जरिया बताता रहा है. इस मुद्दे पर लावरोव ने कहा, “उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम उनके वैज्ञानिकों की मेहनत का परिणाम है. हम उनके परमाणु विकास के पीछे की वजहों को समझते हैं और उनका सम्मान करते हैं.”
बैठक के दौरान उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चोए ने दोहराया कि उनका देश रूस के यूक्रेन युद्ध में बिना शर्त समर्थन करता है. लावरोव ने भी उत्तरी कोरियाई सैनिकों के उस सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया जो उन्होंने रूस के कुर्स्क बॉर्डर क्षेत्र में यूक्रेनी घुसपैठ को रोकने में दिया.
उत्तर कोरिया और रूस के बीच बीते वर्षों में सैन्य और आर्थिक सहयोग गहरा हुआ है. उत्तर कोरिया रूस को हथियार और गोला-बारूद मुहैया कराता है, जबकि रूस उसके बदले सैन्य तकनीक और आर्थिक सहायता प्रदान करता है. इससे अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की चिंता बढ़ी है कि रूस उत्तर कोरिया को ऐसी संवेदनशील तकनीक न दे दे, जिससे उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम और भी खतरनाक बन जाए.

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