
ईरान में लगी इस घड़ी को क्यों बंद करना चाहते हैं नेतन्याहू? जो बताती है कब खत्म होगा इजरायल
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इजरायल और ईरान के बीच भले ही अब सीजफायर हो गया है, लेकिन वॉर एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह शांति किसी बड़े तूफान से पहले की खामोशी हो सकती है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि ईरान अभी भी परमाणु शक्ति बनने की राह से पीछे नहीं हटा है. ईरानी मीडिया और CNN की रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के कई न्यूक्लियर प्लांट्स पर हमले हुए हैं
इजरायल और ईरान के बीच भले ही अब सीजफायर हो गया है, लेकिन वॉर एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह शांति किसी बड़े तूफान से पहले की खामोशी हो सकती है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि ईरान अभी भी परमाणु शक्ति बनने की राह से पीछे नहीं हटा है. ईरानी मीडिया और CNN की रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के कई न्यूक्लियर प्लांट्स पर हमले हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद वह परमाणु शक्ति बनने की पूरी क्षमता रखता है. अभी तक उसके यूरेनियम स्टॉक को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है.
वहीं, इस जंग की जड़ यानी फिलिस्तीन का मुद्दा अब भी जस का तस बना हुआ है. ईरान की रिजीम इससे पीछे हटने को तैयार नहीं है. इजरायल के लिए उसकी नफरत कितनी गहरी है, इसका प्रतीक बनी थी तेहरान के पेलेस्टाइन स्क्वायर में लगी एक डिजिटल घड़ी, जो इजरायल के खात्मे की उल्टी गिनती कर रही है. घड़ी में जो वक्त तय किया गया था, वह था साल 2040 — क्योंकि 2015 में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई ने भविष्यवाणी की थी कि अगले 25 सालों में इजरायल का अंत हो जाएगा.
इस भविष्यवाणी के प्रतीक के रूप में इस घड़ी को साल 2017 में 'कुद्स डे' पर लगाया गया था. कुद्स डे, ईरान में रमजान के आखिरी जुमे (शुक्रवार) को मनाया जाता है, जिसमें फिलिस्तीन की आजादी की मांग की जाती है और इजरायल के खिलाफ नारे लगाए जाते हैं.
लेकिन 23 जून 2025 को कहानी ने करवट ली. वही घड़ी जो इजरायल के अंत की गिनती कर रही थी, अब इजरायली मिसाइल हमले में मलबे में तब्दील हो चुकी है. इस हमले का दावा इजरायल के रक्षा मंत्री योआव गैलंट ने किया. हालांकि, ईरान ने इस दावे से इनकार करते हुए कहा कि घड़ी अब भी काम कर रही है.
यह सिर्फ टाइमर नहीं था, आइडियोलॉजी का सिंबल यह घड़ी एक टाइमर से कहीं बढ़कर थी—यह एक आइडियोलॉजिकल पोस्टर थी, जिस पर फारसी, अरबी और अंग्रेज़ी में लिखा था कि इजरायल खत्म होने वाला है. इसे पेलेस्टाइन स्क्वायर जैसे रणनीतिक स्थान पर लगाया गया था ताकि ईरान खुद को दुनिया के सामने इजरायल विरोधी केंद्र के रूप में स्थापित कर सके, खासकर मुस्लिम देशों के लिए.
जब घड़ी रुक गई थी... साल 2021 में एक बिजली संकट के चलते यह घड़ी कुछ समय के लिए बंद हो गई थी. तब ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था और ढांचा उजागर हुआ. सोशल मीडिया पर इसका मजाक उड़ाया गया कि जो देश अपनी घड़ी नहीं चला सकता, वो इजरायल को क्या मिटाएगा! अब इजरायल ने इस प्रतीक को निशाना बनाकर यह साफ कर दिया है कि इजरायल का समय वह खुद तय करेगा.

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