
'ईरानी लड़ने में फिसड्डी, लेकिन बातचीत में माहिर...', जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप का बयान
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जंग शुरू होने के बाद अपनी पहली कैबिनेट बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि ईरान अब समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहा है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह संकेत भी दे दिया कि शायद अब बहुत देर हो चुकी है और अमेरिका अब इस बातचीत में दिलचस्पी नहीं दिखाएगा.
अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग को आज 27 दिन हो चुके हैं. इस भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है. चौथे हफ्ते में पहुंची इस जंग के बीच ट्रंप ने ईरान पर चुटकी लेते हुए कहा कि 'ईरानी लड़ने में भले ही कमजोर हों, लेकिन बातों के धनी और मोलभाव करने में बड़े माहिर हैं.'
ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका के उतरने के बाद, डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक की. मीटिंग की शुरुआत में ही ट्रंप ने साफ कर दिया कि फिलहाल बातचीत की जो भी खबरें चल रही हैं, उसका दबाव अमेरिका पर नहीं बल्कि ईरान पर है. उन्होंने अपने उसी पुराने और बेबाक अंदाज में दावा किया, 'डील के लिए वे लोग बेताब हैं, मैं नहीं. वे फिर से बातचीत शुरू करना चाहते हैं, लेकिन अभी हमने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है कि हमें उनसे बात करनी भी है या नहीं.'
ईरानी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने उन्हें एक तरह से 'शातिर' बताया. उन्होंने कहा कि वे लोग मूर्ख नहीं हैं, बल्कि अपने तरीके से काफी चालाक हैं और जब बातचीत के लिए बैठते हैं, तो बड़े मजबूत साबित होते हैं. हालांकि, उन्होंने एक बार फिर ईरान की सैन्य ताकत की हवा निकालते हुए कह दिया कि लड़ाई के मैदान में वे उतने असरदार नहीं हैं.
ईरान ने दावों को बताया हवाई
दूसरी तरफ, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. दरअसल, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल कोई औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है और ट्रंप जो कह रहे हैं, वो सिर्फ अटकलें हैं. तेहरान ने अमेरिका के हालिया शांति प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है. उनका कहना है कि यह प्रस्ताव पूरी तरह एकतरफा है, जो सिर्फ अमेरिका और इजरायल के फायदे के लिए बनाया गया है.
ईरान का आरोप है कि अमेरिका चाहता है कि वे अपनी सुरक्षा छोड़ दें, जबकि बदले में पाबंदियां हटाने का कोई पक्का भरोसा भी नहीं दिया जा रहा. हालांकि, ईरान ने ये जरूर कहा है कि बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं. अगर अमेरिका अपनी जिद छोड़कर जमीनी हकीकत को समझे, तो समाधान निकल सकता है. फिलहाल तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश दोनों के बीच सुलह कराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. अब देखना ये होगा कि आने वाले दिनों में जंग और भड़केगी या बातचीत की मेज पर कोई रास्ता निकलेगा.

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