
'यह हमारा युद्ध नहीं, दुनिया के लिए आपदा है... हम नहीं कूदेंगे', ट्रंप को जर्मनी की दो टूक
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जर्मनी के रक्षा मंत्री ने कहा कि ईरान युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं के लिए आपदा है. जंग शुरू होने से पहले किसी ने जर्मनी से नहीं पूछा ना कोई चर्चा की. ऐसे में यह हमारा युद्ध नहीं है और हम इसमें उलझना नहीं चाहते.
मिडिल ईस्ट की महाजंग और भीषण होती जा रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बदलते बयानों के बीच यह अब तक साफ नहीं है कि महायुद्ध कब खत्म होगा. होर्मुज की ईरानी नाकेबंदी को देखते हुए ट्रंप नाटो सहयोगियों को जंग में उतरने की अपील कर चुके हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि यूरोपीय देश इस युद्ध में अमेरिका का साथ देंगे?
यूरोप के कई देश खुलकर ईरान जंग में ट्रंप का साथ देने से बच रहे हैं. अब जर्मनी ने भी अपनी स्थिति साफ कर दी है. जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने गुरुवार को ईरान युद्ध को आर्थिक रूप से विनाशकारी स्थिति बताया. उन्होंने कहा कि जर्मनी इस संघर्ष में उलझना नहीं चाहता. पिस्टोरियस इन दिनों ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं. वहीं उन्होंने कहा कि जंग प्रभावित इलाके में शांति के लिए हरसंभव मदद करने के लिए जर्मनी तैयार है. उन्होंने जल्द से जल्द युद्धविराम की अपील की.
'यह युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं के लिए आपदा'
जर्मनी के रक्षा मंत्री ने ऑस्ट्रेलियाई संसद भवन में पत्रकारों से कहा, 'मैं स्पष्ट रूप से कह देना चाहता हूं कि यह युद्ध दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं के लिए आपदा है. जंग शुरू होने से पहले किसी ने हमसे पहले किसी ने नहीं पूछा ना कोई चर्चा की. यह हमारा युद्ध नहीं है और इसलिए हम इसमें खींचे जाना नहीं चाहते'.
बता दें कि मिडिल ईस्ट महाजंग ने पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा दी है. अमेरिका में भी इसे खत्म करने को लेकर चर्चा हो रही है. Wall Street Journal की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के साथ जारी युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहते और आने वाले कुछ हफ्तों में इसे खत्म करने की कोशिश में हैं.
ट्रंप आने वाले कुछ हफ्तों में इस संघर्ष पर पूर्णविराम लगाना चाहते हैं ताकि वे अपने अन्य घरेलू और राजनीतिक एजेंडों पर ध्यान केंद्रित कर सकें. ट्रंप का मानना है कि युद्ध अपने अंतिम चरण में है और उन्होंने अपने सहयोगियों को सार्वजनिक रूप से बताए गए 4-6 हफ्तों के टाइमलाइन पर टिके रहने के निर्देश दिए हैं.

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मिडिल ईस्ट संघर्ष पर चिंता जताते हुए फ्रांसीसी राजनयिक जीन आर्नो को विशेष दूत नियुक्त किया है. उन्होंने कहा कि हालात नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं और बड़े युद्ध का खतरा बढ़ रहा है. गुटेरेस ने शांति वार्ता को जरूरी बताते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वैश्विक आपूर्ति पर असर की चेतावनी दी. उन्होंने अमेरिका-इजरायल से युद्ध खत्म करने और ईरान व हिज़्बुल्लाह से हमले रोकने की अपील की.

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