
इस मुल्क में 92 फीसदी कपल ले लेते हैं डिवोर्स, जानें भारत में कैसे विकराल हो रहा है तलाक का संकट
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दुनिया में सबसे कम तलाक भारत में होते हैं. लेकिन आंकड़े बताते हैं कि भारत में भी अब तलाक के मामले धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं. आखिरी जनगणना की मानें तो भारत में करीब 14 लाख लोग तलाकशुदा थे. जबकि, 35 लाख ऐसे थे जो पति या पत्नी से अलग-अलग रह रहे थे.
बेंगलुरु के AI इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या का मामला चर्चा में बना है. अतुल सुभाष ने 9 दिसंबर को खुदकुशी कर ली थी. अतुल ने अपनी मौत के लिए पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया, साले अनुराग सिंघानिया और चाचा सुशील सिंघानिया को जिम्मेदार ठहराया था. अतुल ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही निकिता और उसके परिवार वाले किसी न किसी बहाने से उनसे पैसे मांगते थे.
अतुल और निकिता की शादी 2019 में हुई थी. दोनों का एक बेटा भी है. हालांकि, शादी के सालभर बाद से ही दोनों अलग-अलग रह रहे थे.
अपनी मौत से पहले अतुल ने लगभग डेढ़ घंटे का एक वीडियो भी पोस्ट किया था. इसमें उन्होंने बताया था कि निकिता और उसके परिवार वालों ने उनके खिलाफ कई सारे झूठे केस दर्ज करवा दिए थे. अतुल और निकिता कई साल से अलग-अलग रह रहे थे. दोनों के बीच तलाक की प्रक्रिया चल रही थी. एलिमनी को लेकर बहस भी चल रही थी. अतुल और निकिता का मामला जौनपुर की फैमिली कोर्ट में चल रहा था.
बहरहाल, अतुल सुभाष का मामला सामने आने के बाद एक धड़ा ऐसा भी है जो तलाक के कानूनों में खामियां निकाल रहा है. भारतीय समाज में तलाक को अच्छा नहीं माना जाता है. फिर भी हर साल लाखों की संख्या में तलाक के मामले अदालतों में जाते हैं.
क्या भारत में बढ़ रहे हैं तलाक के मामले?
आजादी के बाद 50 के दशक में हिंदू कोड बिल आया. इस कानून ने महिलाओं को तलाक का अधिकार दिया. इसके बाद 1976 में इसमें संशोधन किया गया और पति-पत्नी को सहमति से तलाक की अनुमति मिली.

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