
'इस तरह के हेक्टिक काम नहीं करूंगा...', विदाई समारोह में बोले चीफ जस्टिस संजीव खन्ना
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जब चीफ जस्टिस संजीव खन्ना से सेवानिवृत के बाद के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा भविष्य में इस तरह के हेक्टिक काम नहीं करना चाहूंगा. हां कानूनी क्षेत्र से जुड़ा रहूंगा. जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले पर पहली बार उन्होंने कहा कि न्यायिक सोच और तर्क दो पलड़े हैं. किसी मामले से संबंधित निर्णय पर पहुंचने के लिए कोई न्यायधीश तथ्यों और तर्कों की समीक्षा करता है. ऐसे में हम किसी मामले के प्लस और माइनस दोनों तर्कों को देखते हैं. फिर भविष्य इस निर्णय पर मुहर लगाता है कि क्या सही था और क्या नहीं.
अपने विदाई समारोह में चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि मैंने कभी भी खुद को जज के तौर पर नहीं देखा क्योंकि मेरी इस पद के प्रति बेहद श्रद्धा है. मैंने 20 साल तक न्यायपालिका की सेवा की है. मेरे मन में मिली-जुली भावना नहीं है. मैं बस खुश हूं. मैं सीजेआई के तौर पर सेवानिवृत्त होने पर खुद को धन्य महसूस करता हूं. दिल्ली हाई कोर्ट का जज बनना अपने आप में एक सपना सच होने जैसा था.
उन्होंने कहा कि जज का गाउन पहनने के बाद मुझे समझ में आया कि जस्टिस का पद कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. चीफ जस्टिस संजीव खन्ना के विदाई समारोह में बोलते हुए जस्टिस बी आर गवई ने कहा कि जस्टिस खन्ना का कार्यकाल न केवल न्यायिक प्रगति के लिए याद किया जाएगा बल्कि उस विनम्रता के लिए भी याद किया जाएगा जिसके साथ उन्होंने इतने उच्च पद की जिम्मेदारियां निभाईं.
जस्टिस गवई ने भी दी विदाई
जस्टिस गवई ने कवि दुष्यन्त कुमार की कविता से अपनी बात खत्म की-
'सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए. मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए.'
जस्टिस गवई ने कहा कि जस्टिस खन्ना का कार्यकाल न्यायपालिका के भीतर परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए था ताकि सिस्टम न केवल बदले बल्कि विकसित भी हो. विदाई समारोह से पहले CJI जस्टिस संजीव खन्ना अपने अंतिम कार्य दिवस में सेरेमोनियल बेंच से उठने के बाद पत्रकारों से मिलने सुप्रीम कोर्ट के प्रेस लाउंज में आए. वहां पत्रकारों ने गुलदस्ते से उनका स्वागत किया. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में अपने कार्यकाल पर पूरी संतुष्टि जताई.

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