
इस्लामाबाद से एक कॉल, घर में घुसकर हमले की गारंटी... क्यों तमतमा गया तालिबान, कैसे टूटी अफगान-पाकिस्तान वार्ता
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इस्तांबुल में शांति वार्ता के दौरान अफगानिस्तान इस बात को लेकर राजी दिखा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ नहीं होगा, लेकिन अफगान तालिबान ने जब यही गारंटी पाकिस्तान से मांगी तो उसने अपना असली रंग दिखा दिया. पाकिस्तान की माने तो उसका एक देश के साथ समझौता है जिसके तहत वो उस देश को अफगानिस्तान में ड्रोन भेजने से नहीं रोक सकता है.
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शांति वार्ता उम्मीद के मुताबिक ही विफल हो गई है. इसके पीछे पाकिस्तान की मक्कारी एक बार फिर से सामने आई है. अफगानिस्तान के साथ शांति स्थापित करने के लिए इस्तांबुल में बातचीत की टेबल पर बैठा पाकिस्तान अफगानिस्तान के अंदर घुसकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर हमला करने की इजाजत चाहता था. अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की इस डिमांड पर तीखी नाराजगी जताई. इस दौरान दोनों पक्षों के बीच गर्मागरम बहस हुई.
तालिबान के साथ शांति वार्ता फेल होने के बाद पाकिस्तान कूटनीतिक मर्यादा को भी भूल गया है. पाकिस्तान के बड़बोले रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान को पाकिस्तान का 'प्यादा' बताया है. और कहा है कि अगर पाकिस्तान पर हमला हुआ तो पाकिस्तान ऐसे किसी हमले का 50 फीसदी ज्यादा जवाब देगा.
वहीं अफगानिस्तान तालिबान ने अपने ही अंदाज में पाकिस्तान को चेताते हुए कहा है कि हमारे पास भले ही परमाणु हथियार नहीं है लेकिन पाकिस्तान को याद रखना चाहिए कि अफगानियों ने अबतक किसी के सामने भी हार नहीं मानी है.
तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच शांति वार्ता लगभग सफल होने ही वाली थी. लेकिन ऐन मौके पर पाकिस्तान ने अपनी मक्कारी वाली चाल चल दी.
टोलो न्यूज ने अफगानिस्तान के अधिकारियों से लिखा है, "अफगान प्रतिनिधिमंडल द्वारा इस्लामाबाद की कुछ मांगों का विरोध करने के बाद, पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल वार्ता की मेज़ से उठकर चला गया, जिससे वार्ता बिना किसी नतीजे के रुक गई."
सूत्रों के अनुसार आखिर-आखिर में कई मुद्दों पर असहमति और पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के अराजनयिक व्यवहार के कारण वार्ता टूट गई.

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