
इन दोनों IPO में पैसे लगाने के लिए उमड़े लोग, HDB का आईपीओ 17 गुना भरा... रिटेल को अलॉटमेंट का सबसे ज्यादा चॉन्स
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HDB के IPO को लेकर क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने सबसे अधिक उत्साह दिखाया, जिन्होंने अपने लिए आरक्षित हिस्से को 58.64 गुना सब्सक्राइब किया. नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) ने 10.55 गुना भरा, सबसे कम रिटेल का हिस्सा सिर्फ 1.51 गुना सब्सक्राइब हुआ.
वैसे तो शुक्रवार को दो IPO क्लॉज हुए, और दोनों आईपीओ को आखिर के कुछ घंटों में जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिले. पहला नाम है- HDB फाइनेंशियल सर्विसेज, जो कि देश के सबसे बड़े बैंक HDFC बैंक की गैर-बैंकिंग वित्तीय शाखा है, इस आईपीओ के सब्सक्रिप्शन आंकड़ों ने आखिरी दिन सबको चौंका दिया है. जबकि संभव स्टील ट्यूब्स IPO को भी बेहतरीन रिस्पॉन्स मिला है.
HDB के IPO पर QIB का जबर्दस्त भरोसा
एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज का आईपीओ 25 जून को खुला था, और तीसरे दिन तक कुल 17.65 गुना सब्सक्राइब हुआ. इस आईपीओ को लेकर निवेशकों से जबर्दस्त रुचि दिखाई. एनएसई के आंकड़ों के अनुसार 12.33 करोड़ शेयरों के ऑफर के मुकाबले 217 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं. IPO का प्राइस बैंड 700-740 रुपये प्रति शेयर था.
HDB के IPO को लेकर क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने सबसे अधिक उत्साह दिखाया, जिन्होंने अपने लिए आरक्षित हिस्से को 58.64 गुना सब्सक्राइब किया. नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) ने 10.55 गुना भरा, सबसे कम रिटेल का हिस्सा सिर्फ 1.51 गुना सब्सक्राइब हुआ. जिस तरह से सबसे कम रिटेल का हिस्सा डेढ़ गुना भरा है, इससे रिटेल निवेशकों को सबसे ज्यादा अलॉटमेंट का चॉन्स है.
बता दें, यह भारत में किसी NBFC के सबसे बड़े आईपीओ में से एक है, जिसमें 2,500 करोड़ रुपये की फ्रेश इश्यू और 10,000 करोड़ रुपये की ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) शामिल है. ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 60-65 रुपये रहा, जो 740 रुपये की ऊपरी कीमत पर 8-10% लिस्टिंग लाभ का संकेत देता है. शेयर आवंटन 30 जून को तय होने की उम्मीद है, और लिस्टिंग 2 जुलाई को बीएसई और एनएसई पर होगी.
संभव स्टील ट्यूब्स आईपीओ (Sambhv Steel Tubes IPO)

यूपी में सरकारी नौकरी का सपना देखना है तो खुद में बहुत सहनशीलता पैदा करनी होगी क्योंकि सिस्टम पर विश्वास तो बन नहीं पा रहा. एग्जाम देकर लंबा इंतजार करना फिर अगर परीक्षा कैंसिल होती है तो दिल में पत्थर रखकर री-एग्जाम, रिजल्ट और जॉइनिंग तक इंतजार करना. सरकार लगातार कह रही है लेकिन परीक्षाएं आयोजित कराने वाली संस्थाएं अब तक एक ऐसा पारदर्शी और स्वच्छ सिस्टम तैयार नहीं कर पाईं.












