
इजरायली हमले से फिर दहला गाजा, दो दर्जन से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत, हिज़्बुल्लाह भी निशाने पर
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मंत्रालय का कहना है कि इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से गाजा में अब तक 40,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं. इस जंग ने भारी तबाही मचाई है और गाजा की 2.3 मिलियन की आबादी में से लगभग 90% को कई बार विस्थापित होना पड़ा है.
Hamas-Israel war: इजरायली सेना ने बुधवार को गाजा समेत फिलिस्तीन के कई इलाकों पर हमला किया. इन हमलों में दो दर्जन से अधिक फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सेना के हवाई हमले में पश्चिमी तट पर पांच फिलिस्तीनी मारे गए, और गाजा पट्टी में 16 महिलाओं और बच्चों सहित कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई.
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि इजरायल द्वारा नामित मानवीय क्षेत्र में एक टेंट कैंप पर मंगलवार को किए गए हमले में कम से कम 19 लोग मारे गए. मंत्रालय का कहना है कि इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से गाजा में अब तक 40,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं. इस जंग ने भारी तबाही मचाई है और गाजा की 2.3 मिलियन की आबादी में से लगभग 90% को कई बार विस्थापित होना पड़ा है.
हिज़्बुल्लाह के 30 ठिकानों पर हमला उधर, इज़राइल ने कहा कि उसने मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के लगभग 30 ठिकानों पर हमला किया. दोनों पक्षों के बीच पिछले 11 महीनों से हमलों का सिलसिला जारी है. 8 अक्टूबर को, हिज़्बुल्लाह ने गाजा में फंसे फिलिस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता दिखाते हुए इज़राइल पर हमले शुरू कर दिए थे, क्योंकि इज़राइल ने एन्क्लेव पर जंग छेड़ दी थी.
इज़राइल ने लेबनानी समूह की तुलना में हिज़्बुल्लाह पर लगभग चार गुना अधिक हमले किए हैं, 120 किमी (75 मील) की सीमा पर 7,800 से अधिक हमले किए हैं.
हिज़्बुल्लाह का गठन 1982 में किया गया था. जिसका मकसद दक्षिणी लेबनान पर इज़राइल के हमले और कब्जे को रोकने के लिए लड़ना है. हिज़्बुल्लाह का कहना है कि अगर गाजा पर इजरायल का हमला बंद हो जाता है, तो वह इज़राइल पर हमले करना बंद कर देगा. हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह का कहना है कि उनका समूह विस्तारित युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन इज़राइल की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए तैयार है.
क्षेत्र में सबसे अधिक युद्ध-प्रशिक्षित गैर-सरकारी लड़ाकू समूह माने जाने वाले हिजबुल्लाह ने साल 2006 में इजरायल के खिलाफ 34 दिनों तक युद्ध लड़ा था, जिसे व्यापक रूप से इजरायल की रणनीतिक और सैन्य विफलता के रूप में देखा गया था. अब कुछ इजरायली नेताओं ने बलपूर्वक ही सही, दक्षिणी लेबनान से हिजबुल्लाह को हटाने का संकल्प लिया है.

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