
आखिर क्यों भारतीय स्टूडेंट्स के वीज़ा रिजेक्ट कर रहा कनाडा? खराब संबंध या कोई और वजह, जानें
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कनाडा सरकार अब उन देशों पर नज़र गड़ाए हुए है जहां से सबसे ज़्यादा वीज़ा फ्रॉड के मामले सामने आ रहे हैं. भारत और बांग्लादेश को ‘हाई रिस्क लिस्ट’ में रखकर कनाडा ने वीज़ा वेरिफिकेशन को और सख़्त बना दिया है.
कनाडा में पढ़ाई और यहां बसने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं. पिछले एक साल में वीज़ा रिजेक्शन रेट में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अब खुलासा हुआ है कि ओटावा सरकार भारत और बांग्लादेश से आने वाले वीज़ा आवेदनों को लेकर गहरी शंका में है और सामूहिक वीज़ा रद्द करने की शक्ति हासिल करने की तैयारी कर रही है.
भारत और बांग्लादेश से जुड़े “फर्जी वीज़ा” मामलों पर चिंता
आंतरिक सरकारी दस्तावेज़ों के मुताबिक, कनाडा के Immigration, Refugees and Citizenship Canada (IRCC), Canada Border Services Agency (CBSA) और कुछ अमेरिकी साझेदार एजेंसियों ने मिलकर एक वर्किंग ग्रुप बनाया है. इसका मकसद है— भारत और बांग्लादेश से आने वाले फर्जी विज़िटर और स्टूडेंट वीज़ा आवेदनों की पहचान और रद्दीकरण.
दस्तावेज़ों में दोनों देशों को “country-specific challenges” बताया गया है, यानी कि इन देशों से आने वाले वीज़ा मामलों में जालसाज़ी या नियमों के उल्लंघन की दर अधिक पाई गई है.
वीज़ा प्रोसेसिंग धीमी, रिजेक्शन बढ़ा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत से आने वाले Temporary Resident Visa (TRV) और स्टूडेंट वीज़ा आवेदनों की जांच अब पहले से कहीं ज़्यादा सख़्त हो गई है. 2023 में जहां औसतन 30 दिनों में आवेदन निपट जाते थे, 2024 तक यह समय बढ़कर 54 दिन हो गया. साथ ही, मंज़ूरी दर में भी गिरावट आई — जनवरी 2024 में 63,000 वीज़ा स्वीकृत हुए थे, जबकि जून तक यह घटकर 48,000 रह गए.

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