
असम के मदरसों को स्कूलों में बदलने के बाद सुधरे हालात, CM हिमंता ने कहा- ये बड़े बदलाव आए
AajTak
मदरसों को स्कूलों में कन्वर्ट किए जाने के बाद अब इन संस्थानों की स्थिति कैसी है. इस बारे में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मदरसों में प्रवेश लेने वाले 4000 से अधिक छात्रों के इस बैच ने सामान्य मोड में मैट्रिक परीक्षा दी है, जो पहली बार उत्तीर्ण हुए हैं.
असम सरकार ने दिसंबर 2020 में सभी सरकारी संचालित मदरसों के कामकाज को बंद करने और उन्हें सामान्य शैक्षणिक संस्थानों में बदलने का फैसला किया था. तीन साल बाद मदरसों और उसके छात्रों के लिए हालत अब काफी सुधर गए हैं. जब ये फैसला लिया गया था तब हिमंता बिस्वा सरमा तत्कालीन राज्य शिक्षा मंत्री थे.
मदरसों को स्कूलों में कन्वर्ट किए जाने के बाद अब इन संस्थानों की स्थिति कैसी है. इस बारे में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि मदरसों में प्रवेश लेने वाले 4000 से अधिक छात्रों के इस बैच ने सामान्य मोड में मैट्रिक परीक्षा दी है, जो पहली बार उत्तीर्ण हुए हैं. दूसरा बैच परीक्षा देने वाला है. यह असम के लिए अच्छी बात है.
डोटियालबारी हाई स्कूल को पहले डोटियालबारी सीनियर मदरसा के नाम से जाना जाता था. ये असम में मोरीगांव जिले के मोइराबारी शहर में स्थित है. स्कूल में वर्तमान में 500 से अधिक छात्र हैं. पिछली मैट्रिक परीक्षा में, 35 स्टूडेंट परीक्षा में शामिल हुए और 100 प्रतिशत पास हुए. 6 स्टूडेंट फर्स्ट डिवीजन पास हुए थे.
दतियालबोरी हाईस्कूल के सहायक शिक्षक हन्नम फारूक ने आजतक को बताया कि अगर मैं बदलावों के बारे में बात करता हूं, तो मदरसों में स्पोर्ट्स वीक पहले से ही था, लेकिन अगर संगीत, गायन या नृत्य के बारे में बात करें तो एक बदलाव देखा गया है. चूंकि यह संस्थान पहले एक धार्मिक संस्थान था, इसलिए इसके कुछ नियम-कायदे भी थे, लेकिन हाईस्कूल में परिवर्तित होने के बाद कुछ राहत देखी जा सकती है.

आज सबसे पहले आपको ये बताएंगे कि हाफ सीजफायर' के बाद अमेरिका की बातचीत ईरान के किस Respected Leader से चल रही है. डोनाल्ड ट्रंप बार-बार इस बात का दावा कर रहे हैं. लेकिन आज ईरान ने पूछा है कि वो Respected Leader कौन है. और Respected Leader से बातचीत चल रही है तो पाकिस्तान के जरिये 15 शर्तों का प्रस्ताव क्यों भेजा है. उससे भी बड़ी बात ये है कि ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को कूड़ेदान में फेंकते हुए सुपर पावर अमेरिका को अपनी शर्तें बता दी हैं. और कहा है कि सीजफायर छोड़ो, अब ईरान तभी रुकेगा जब अमेरिका उसकी 5 शर्तें मानेगा. इन शर्तों में ईरान ने कहा कि उसे युद्ध में हुए नुकसान का पूरा हर्जाना मिलना चाहिए. ईरान की टॉप लीडरशिप पर हमले बंद होने चाहिए, सारे प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए. ईरान को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का कानूनी अधिकार मिलना चाहिए.

आज विशेष में बात इजरायल की. जहां ईरान के हमलों की इंटेंसिटी बढ़ी हुई है. ईरान लगातार इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन से अटैक कर रहा है. लेकिन इजरायल ने अपना सिस्टम ही ऐसा डेवेलप किया हुआ है कि ईरान के भीषण हमलों के बाद भी इजरायल में इतना नुकसान नहीं हो रहा है. भले ही ईरान के हमलों में इमारतें तबाह हो रही हों, गाड़ियों की क्षति हो रही हो. लेकिन लोगों की जान बची हुई है. इजरायल ने कैसे ईरान के हमलों से बचने की तैयारी की हुई है.

सीजेआई सूर्यकांत एक मामले की सुनवाई के दौरान उस वक्त नाराज हो गए, जब याचिकाकर्ता निखिल कुमार पुनिया के पिता ने CJI के भाई को फोन कर दिया. मामला बौद्ध धर्म अपनाकर अल्पसंख्यक आरक्षण मांगने से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे 'नए तरह का धोखा' बताते हुए जांच के आदेश दे चुका है. सीजेआई ने इसे गंभीर कदाचार मानते हुए अवमानना की चेतावनी दी.










