
अरविंद केजरीवाल जेल से चुनाव तो लड़ सकते हैं, लेकिन वोट डालने पर मनाही! जानिए किन हालात में मिलती है छूट
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लोकसभा चुनाव का दूसरा चरण शुरू हो चुका, जिसमें 13 राज्यों और यूनियन टैरिटरी में मतदान जारी है. इस दौरान हर एलिजिबल वयस्क अपना वोट डालेगा. लोग एक से दूसरे राज्य, यहां तक कि विदेशों से भी मतदान के लिए पहुंच रहे हैं. लेकिन क्या जेल में बैठे कैदियों या आरोपियों के पास भी वोटिंग का अधिकार है? इसपर काफी विवाद रहा.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कथित शराब घोटाला मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं. इस बीच लोकसभा चुनाव के दूसरा चरण में वोट भी डाले जा रहे हैं. फिलहाल केजरीवाल किस सीट से चुनाव लड़ेंगे या फिर लड़ेंगे भी या नहीं, ये स्पष्ट नहीं, लेकिन इतना तय है कि जेल में रहते हुए उन्हें वोट देने की इजाजत नहीं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के क्राइम इन इंडिया 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे 5 लाख से ज्यादा व्यक्ति हैं जो इस लोकसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे क्योंकि वे जेल की सजा काट रहे हैं.
यहां सोचने की बात है कि जेल में रहते हुए जब इलेक्शन में खड़ा होने का हक मिल सकता है, तब वोटिंग का क्यों नहीं!
लगभग डेढ़ दशक पहले पटना हाई कोर्ट में ऐसा मामला आया, जिसमें जेल की सजा काट रहे एक कैदी ने चुनाव लड़ने की मंशा जताई. अदालत ने इसपर मना करते हुए कहा कि जब कैदियों को वोट देने का हक नहीं है, तो चुनाव लड़ने जैसी जिम्मेदारी की छूट कैसे मिल सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को मंजूरी दी थी लेकिन बाद में तत्कालीन यूपीए सरकार ने कानून में बदलाव करते हुए जेल में बंद लोगों को चुनाव में खड़ा होने की इजाजत दे दी. ये साल 2013 की बात है. लेकिन जेल में बंद शख्स के पास वोटिंग राइट अब भी नहीं.
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) 1951 की धारा 62(5) के तहत जेल में बंद कोई भी व्यक्ति वोट नहीं डाल सकता, फिर चाहे वो हिरासत में हो या सजा काट रहा हो. वोट डालना एक कानूनी अधिकार है. अगर कोई कानून का उल्लंघन करे तो उसका ये हक अपने-आप निरस्त हो जाता है. दोषी के अलावा जिनपर ट्रायल चल रहा हो, वे भी इलेक्शन में मतदान नहीं कर सकते.

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