
अमेरिका में यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की, बाइडेन और PM मोदी के बाद अब ट्रंप से करेंगे मुलाकात
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एक प्रेस कान्फ्रेंस में गुरुवार को ट्रंप ने अपनी आगामी मीटिंग के बारे में बताया कि जो न्यूयॉर्क में उनके ट्रंप टॉवर में होंगी. जेलेंस्की संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए अमेरिका के दौरे पर हैं. वह उन विदेशी नेताओं में से हैं जिन्होंने 5 नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले अंतिम दिनों में ट्रंप से मिलने की मांग की है.
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की अमेरिका के दौरे पर हैं. शुक्रवार 27 सितंबर को वह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप से मिलने वाले हैं. इससे पहले जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से भी मुलाकात की थी. बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान जेलेंस्की ने न्यूयॉर्क में पीएम मोदी से मुलाकात की थी.
एक प्रेस कान्फ्रेंस में गुरुवार को ट्रंप ने अपनी आगामी मीटिंग के बारे में बताया कि जो न्यूयॉर्क में उनके ट्रंप टॉवर में होंगी. जेलेंस्की संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए अमेरिका के दौरे पर हैं. वह उन विदेशी नेताओं में से हैं जिन्होंने 5 नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले अंतिम दिनों में ट्रंप से मिलने की मांग की है.
न्यूयॉर्क में पीएम मोदी से मिले जेलेंस्की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को न्यूयॉर्क में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी. करीब एक महीने में दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी मुलाकात थी. उससे पहले पीएम मोदी ने 23 अगस्त को यूक्रेन का दौरा किया था और भारत की ओर से यूक्रेन में जल्द शांति की वापसी के लिए हर संभव तरीके से योगदान देने की इच्छा जताई थी.
पीएम मोदी ने कहा- बिना शांति विकास असंभव
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जानकारी देते हुए बताया था कि, 'राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने हमेशा शांति के रास्ते पर आगे बढ़ने की बात की है. अगर शांति नहीं होगी तो विकास भी नहीं हो सकेगा. युद्ध खत्म होगा या नहीं, ये तो वक्त ही बताएगा, लेकिन सबकी कोशिशें किसी न किसी तरह से युद्ध का अंत ढूंढने पर ही केंद्रित हैं.'

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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