
अमेरिका में बसे भारतीयों की मांग- दिवाली पर घोषित हो नेशनल हॉलीडे, US में अभी इन जगहों पर होती है छुट्टी
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मौजूदा समय में दिवाली के दिन अमेरिका के कुछ राज्यों में छुट्टी रहती है. न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी के स्कूलों में छुट्टी रहती है. पेन्सिल्वेनिया अमेरिका का ऐसा पहला राज्य था, जहां दिवाली को आधिकारिक छुट्टी घोषित की गई थी. इसके बाद न्यूयॉर्क सिटी में भी दिवाली के दिन छुट्टी घोषित की गई थी.
Indians in US: अमेरिका में रहने वाले भारतीयों की संख्या लगभग पचास लाख है. विदेशी सरजमीं पर रहने वाले ये भारतीय अपनी संस्कृति से जुड़े हुए हैं. यही वजह है कि दिवाली से लेकर होली जैसे भारतीय त्योहारों को बड़ी आत्मीयता से मनाया जाता है. लेकिन इन भारतीयों की लंबे समय से मांग रही है कि अमेरिका में भी दिवाली के दिन नेशनल हॉलीडे घोषित किया जाए.
मौजूदा समय में दिवाली के दिन अमेरिका के कुछ राज्यों में छुट्टी रहती है. न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी के स्कूल बंद रहते हैं. पेन्सिल्वेनिया अमेरिका का ऐसा पहला राज्य था, जहां दिवाली को आधिकारिक छुट्टी घोषित की गई थी. इसके बाद न्यूयॉर्क सिटी में भी दिवाली के दिन छुट्टी घोषित की गई.
अमेरिका में प्रवासी भारतीयों के संगठन द फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन (एफआईए) के सदस्य कीर्ति देसाई ने आज तक डिजिटल को बताया कि अमेरिका में 2021 में दीपावली डे एक्ट संसद में पेश किया गया था. इसका मकसद था कि देशभर में दिवाली को फेडरल हॉलीडे के रूप में घोषित किया जाए. अभी तक अमेरिका के कई राज्यों में दिवाली के दिन छुट्टी की व्यवस्था है लेकिन यह ऑप्शनल है. मांग है कि इसे राष्ट्रीय अवकाश में तब्दील किया जाए.
देसाई ने बताया कि अनुमानित रूप से अमेरिका में 2.35 करोड़ लोग एशियाई मूल के हैं. इनमें सबसे ज्यादा 52 लाख नागरिक चीनी मूल के हैं जबकि भारतवंशी दूसरे नंबर पर हैं. अमेरिका में भारतवंशियों की आबादी लगभग 48 लाख है. इनमें 16 लाख से ज्यादा वीजा होल्डर हैं. जबकि 10 लाख से ज्यादा ऐसे हैं जिनका जन्म ही अमेरिका में हुआ है. ऐसे में हम भारतीयों की मांग जायज है कि दिवाली को अनिवार्य रूप से नेशनल हॉलीडे घोषित किया जाए.
तीन साल से लटका है दीपावली डे एक्ट
अमेरिका में 2021 में दिवाली की पूर्वसंध्या पर सांसद राजा कृष्णमूर्ति और कैरोलिन मेलोनी ने दिवाली को पब्लिक हॉलीडे घोषित करने की मांग के साथ दीपावली डे एक्ट (Deepavali Day Act) को संसद में पेश किया था. इस एक्ट को भारतीय मूल के सांसदों का भरपूर समर्थन मिला था. लेकिन यह पारित नहीं हो पाया था.

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