
अफवाह या हकीकत... मेहंदीपुर बालाजी का प्रसाद खाने से भूत पीछे पड़ जाते हैं?
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राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर को लेकर लोगों में कई अजीबोगरीब मान्यताएं हैं. कुछ लोग मानते हैं कि यहां का प्रसाद खाने से भूत-पिशाच पीछे पड़ जाते हैं. ऐसा भी कहा जाता है कि यहां यातनाएंं देकर भूत-बाधा का इलाज किया जाता है.
'मेहंदीपुर बालाजी मंदिर का प्रसाद खाने या घर लाने से भूत पीछे पड़ जाते हैं. यहां यातनाएं देकर प्रेत बाधा दूर की जाती है. लोगों को कोड़े मारे जाते हैं. उन्हें जंजीरों से बांधा जाता है. 100-100 किलो के भारी भरकम पत्थर उनके शरीर पर रख दिए जाते हैं.' राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर को लेकर ऐसी और भी कई अजीबोगरीब मान्यताएं हैं. लेकिन क्या सच में ऐसा होता है? मेहंदीपुर बालाजी के इर्द-गिर्द घूमती इन मान्यताओं के पीछे की हकीकत को जानने के लिए हम खुद बालाजी महाराज की उस पवित्र स्थली पर पहुंचे.
यहां हमारी मुलाकात विजयनाथ योगी से हुई. उम्र 35 साल रही होगी. वह एक पहाड़ पर स्थित अंजनी माता के प्राचीन मंदिर में मुख्य पुजारी व सेवादार हैं. उन्होंने बताया कि बालाजी महाराज के दर्शन के बाद अंजनी माता के दर्शन किए जाते हैं. फिर दो पहाड़ पर शक्ति स्थल के दर्शन होते हैं. आखिर में तीन पहाड़ पर प्रेतराज, भैरो बाबा, घाटे वाले बाबा और समाधि वाले बाबा के दर्शन के बाद यात्रा संपन्न होती है.
सफेद लिबास और गले में कंठी माला धारण किए महाराज ने बताया कि जिन लोगों पर भूत-प्रेत या नकारात्मक शक्तियों का कब्जा हो जाता है, उन्हें यहां दर्शन के लिए लाया जाता है. फिर अर्जी लगाई जाती है. प्रसाद के रूप में दो लड्डू खिलाए जाते हैं. इतने में ही बाबा का चमत्कार दिख जाता है. ऐसे सैकड़ों-हजारों लोग यहां से ठीक होकर जाते हैं. बाबा सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.'
प्रेत बाधा से मुक्ति दिला रहे बी.टेक बाबा दिलचस्प बात ये है कि विजयनाथ योगी जी पेशेवर इंजीनियर रहे हैं. उन्होंने जयपुर से पॉलिटेक्निक के बाद बीटेक किया है. पढ़ाई के बाद एचसीएल कंपनी में कुछ समय नौकरी भी की. वो कहते हैं ‘लगा कि ऐसा कोई काम करना चाहिए जिससे समाज का भला हो. तब मेहंदीपुर बालाजी वापस आ गया. यहां आकर बाबा की सेवा की. अब महीने में एकाध बार ही पहाड़ से नीचे जाते हैं. इस घने जंगल में बाबा और माता अंजनी की सेवा का जो आनंद है, वो किसी और चीज में नहीं. यहां उनकी चौथी पीढ़ी माता अंजनी की सेवा कर रही है’.
मेहंदीपुर बालाजी में अधिकांश महिलाएं ही क्यों निवारण के लिए आती हैं? 'महिलाओं का आत्मबल कमजोर होता है. आत्मविश्वास कमजोर होता है. वो भावनात्मक रूप से जल्दी टूट जाती हैं. यही कारण है कि भूत-प्रेत इनके शरीर पर आसानी से कब्जा कर लेते हैं. हमने बचपन से यहां औरतों, पुरुषों और बच्चों को ठीक होते देखा है.' क्या मेहंदीपुर बालाजी में शरीर से भूत-प्रेत निकालने के लिए यातनाएं दी जाती हैं? 'भूत उतारने की ऐसी तंत्र विद्या हमने बचपन में सुनी और देखी हैं. तब हम तीसरी-चौथी कक्षा में रहे होंगे. उस वक्त भूत उतारने के लिए लोगों के शरीर पर 200-300 किलो के भारी-भरकम पत्थर रख दिए जाते थे. कुछ लोगों को तो जंजीरों से भी बांधा जाता था. कोड़ों से पीटा भी जाता था. ये हमारी सामान्य कोर्ट-कचहरी जैसी ही एक परंपरा थी. जहां भूतों पर मुकदमा चलाया जाता था और फिर सजा, यातनाएं दी जाती थीं.'
'लेकिन मानवाधिकार आयोग का एक संज्ञान आने के बाद इस प्रकार की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई. इसे बंद हुए 15 से 20 साल हो चुके हैं. भूत-पिशाच की बाधा से मुक्ति पाने के लिए बालाजी महाराज का आशीर्वाद ही काफी है. '

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