
अखिलेश के पीडीए से अलग तेजस्वी का MY समीकरण क्यों बन गया महागठबंधन की कमजोर कड़ी
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अखिलेश यादव जल्द ही विधानसभा चुनावों में महागठबंधन का प्रचार करने के लिए बिहार पहुंचने वाले हैं. अखिलेश के पीडीए के तर्ज पर तेजस्वी यादव के MY-BAAP फार्मूला बनाया पर सीट बंटवारे के बाद आरजेडी में केवल माई ही रह गया, 'बाप' नदारद है.
बिहार विधानसभा चुनावों के पहले तक तेजस्वी के माई बाप फार्मूले की बहुत चर्चा थी. पर सीट बंटवारे के बाद देखने के बाद ऐसा लगता है कि आरजेडी से बाप तो विदा हो गया केवल एमवाई ही शेष रह गया . चूंकि बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीति बहुत कुछ एक जैसी है. जिस तरह बिहार में लालू परिवार के आधिपत्य वाली कंपनी आरजेडी है ठीक उसी तरह उत्तर प्रदेश में मुलायम परिवार की आधिपत्य वाली पार्टी समाजवादी पार्टी है. एक बात और खास है कि दोनों ही पार्टियां अपने अपने राज्यों में बीजेपी के खिलाफ ताल ठोंककर खड़ी हैं.
बिहार चुनावों से ठीक पहले महागठबंधन (RJD, कांग्रेस, वाम दल, VIP आदि) में जातिगत समीकरणों को लेकर हलचल तेज है. इस बीच बिहार में अखिलेश यादव महागठबंधन का प्रचार करने जाने वाले हैं. अखिलेश यादव का PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मॉडल, जो उत्तर प्रदेश में 2024 लोकसभा चुनावों में सपा-कांग्रेस गठबंधन को सफलता दिला चुका है, बिहार में तेजस्वी यादव के पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को 'बूस्टर डोज' देने की कोशिश के केंद्र में है. लेकिन सवाल यह है कि क्या तेजस्वी का MY समीकरण महागठबंधन को लोकसभा चुनावों में मिली समाजवादी पार्टी वाली सफलता दिला सकेगा?
अखिलेश यादव का 2024 मॉडल बनाम तेजस्वी का 2025 मॉडल
सीट बंटवारे में यह स्पष्ट हो गया कि तेजस्वी यादव का MY-BAAP फॉर्मूला अब मुख्य रूप से एमवाई में बदल चुका है. बिहार में मुस्लिम (लगभग 17-18% आबादी) और यादव (14%) वोटों पर टिका है, जो बिहार की कुल आबादी का करीब 30-35% बनता है. आरजेडी ने करीब 51 यादवों और 18 मुस्लिम समुदाय को टिकट देकर यह दिखा दिया है कि उनके फार्मूले से BAAP (बहुजन-अगड़ा-आधी आबादी -पूअर) गायब हो चुका है. पर आरजेडी ने यह नहीं समझा कि 2020 चुनावों में यही फार्मूला महागठबंधन को 110 सीटों पर समेट दिया था. क्यों कि इस फार्मूले के चलते ही अगड़ी जातियों भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण – करीब 15-20%) का समर्थन नहीं मिला.
इसके उलट, अखिलेश का PDA मॉडल अधिक समावेशी है. पिछड़े (OBC 51%), दलित (16%), अल्पसंख्यक (17%) – जो यूपी में सवर्णों को भी आकर्षित कर 37% से अधिक टिकट वितरण के जरिए गठबंधन को मजबूत बनाया. बिहार में राहुल गांधी-तेजस्वी-अखिलेश की 'वोटर अधिकार यात्रा' (अगस्त 2025) इसी PDA को MY से जोड़ने की कोशिश थी, लेकिन MY की जड़ें इतनी गहरी हैं कि PDA का विस्तार मुश्किल हो रहा है.
हालिया टिकट वितरण में RJD ने 51 यादव उम्मीदवार उतारे (आबादी से ढाई गुना ज्यादा), लेकिन मुसलमानों को सिर्फ 12% सीटें (18 उम्मीदवार)। इससे EBC (27%) और सवर्ण वोट अलग हो सकते हैं. चिराग पासवान ने इसे 'जातिवाद' बताते हुए अपना MY (महिलाएं-युवा) फॉर्मूला पेश किया, जो NDA को फायदा पहुंचा रहा है.

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