
US-Iran War: 'जंग के जिम्मेदार देशों को निपटना होगा...', भारत ने ठुकराई ऑयल रिजर्व जारी करने की अपील
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इंटरनेशलन एनर्जी एजेंसी की ओर से भारत से अपील की गई थी कि वह तेल की कीमतों को कम करने के लिए ऑयल रिजर्व जारी करे, जिसे भारत ने ठुकरा दिया है. ऐसा एक रिपोर्ट में दावा किया गया है.
G7 देशों समेत अन्य देशों के रणनीतिक तेल भंडार जारी करने की अपील के बाद इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने भारत से संपर्क किया था और भारत को इसमें शामिल होने के लिए कहा था. लेकिन भारत ने रणनीतिक तेल रिजर्व जारी करने की पहल में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है.
पीटीआई समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का स्टैंड क्लियर है, भारत भंडार जारी नहीं करेगा. एक सूत्र ने समाचार एजेंसी को बताया कि (कीमतों में वृद्धि का कारण बनने वाला) संकट हमारी देन नहीं है. इसके लिए जिम्मेदार लोगों को इससे निपटना होगा और कीमतों को कम करने के लिए परिस्थितियां बनानी होंगी.
भारते के लिए इमरजेंसी में आएगा काम भारत के पास 53 लाख टन भूमिगत रणनीतिक भंडार है, लेकिन वर्तमान में यह केवल 80 प्रतिशत ही भरा हुआ है. सूत्रों ने कहा कि हमारी नीति 'भारत फर्स्ट' है, और आगे बताया कि आपूर्ति में रुकावट की स्थिति में भारत के भंडारों का उपयोग किया जाएगा.
ईंधन निर्यात को रोकने की योजना नहीं हालांकि IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल इस मुद्दे पर भारतीय अधिकारियों से बात करने वाले हैं, लेकिन भारत आईईए का पूर्ण सदस्य नहीं है और इसलिए संस्था के आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है. भारत आईईए का सहयोगी सदस्य है. यह 2021 में नई दिल्ली द्वारा किए गए कार्यों से एक विचलन है. भारत ने अमेरिका के प्रयासों में शामिल होकर अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) से 5 मिलियन बैरल तेल जारी किया था. इसके अलावा, भारत की अपने ईंधन निर्यात को प्रतिबंधित करने की भी कोई योजना नहीं है, और उसके पास पेट्रोल, डीजल और एटीएफ का पर्याप्त भंडार है.
तेल भंडार जारी करने की अपील IEA ने G7 देशों से आपातकालीन तेल भंडार जारी करने के लिए अपील की है. जापान की वित्त मंत्री सात्सुकी कातायामा के अनुसार, G7 देशों के वित्त मंत्रियों के साथ एक ऑनलाइन बैठक के दौरान यह बात कही गई. कातायामा ने कहा कि आईईए ने हर देश से तेल भंडार को समन्वित रूप से जारी करने की अपील की है. उन्होंने आगे कहा कि जी7 ने ऊर्जा बाजार में हो रहे घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखने और तेल भंडार जारी करने सहित वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का समर्थन करने के लिए आवश्यक उपाय करने पर सहमति व्यक्त की है.
इस बैठक में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी), विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रतिनिधियों ने भाग लिया. कातायामा ने पुष्टि की कि जी7 जल्द ही ऊर्जा मंत्रियों की एक बैठक आयोजित करेगा जिसमें आगे के कदमों पर चर्चा की जाएगी.

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इंटरनेशलन एनर्जी एजेंसी की ओर से भारत से अपील की गई थी कि वह तेल की कीमतों को कम करने के लिए ऑयल रिजर्व जारी करे, जिसे भारत ने ठुकरा दिया है. ऐसा एक रिपोर्ट में दावा किया गया है.

फरवरी के अंत में कच्चे तेल की कीमतें 68 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अमेरिका और इज़रायल के ईरान पर हमले के बाद बढ़कर 110 डॉलर तक पहुंच गई हैं. यदि यह स्थिति इसी तरह बनी रहती है, तो आने वाले एक महीने में तेल की कीमतें 200 डॉलर तक पहुंच सकती हैं. ईरान ने UAE, सऊदी अरब, कतर और ओमान की रिफाइनरी और LNG संयंत्रों पर हमला किया है, जिससे उत्पादन रुक गया है. तेल का ये संकट दुनिया के लिए कितनी बड़ी मुश्किल खड़ी कर देगा? देखें वीडियो.











