
Stock Market Crash Reason: ये 5 कारण... जिनसे दिनभर क्रैश होता रहा शेयर बाजार, हर ओर गिरावट
AajTak
Stock Market Crash: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए सोमवार का दिन खराब साबित हुआ. बीएसई सेंसेक्स शुरुआती बड़ी गिरावट के बाद रिकवरी के बावजूद 1352 अंक फिसलकर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी 422 अंक गिरकर क्लोज हुआ.
शेयर बाजार सोमवार को दिनभर क्रैश (Stock Market Crash) हुआ और मार्केट क्लोज होने पर मामूली रिकवरी के बावजूद सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स बड़ी गिरावट लेकर बंद हुए. BSE Sensex दिन के कारोबार के दौरान 2400 अंक से ज्यादा टूटने के बाद अंत में भी 1353 अंक फिसलकर 77,566 के लेवल पर बंद हुआ, तो वहीं दूसरी ओर NSE Nifty शुरुआती कारोबार में 800 अंक फिसलने के बाद मार्केट क्लोज होने पर 422 अंक फिसलकर 24,028 पर बंद हुआ. SBI, IndiGo, Adani Ports समेत कई बड़े शेयर बाजार की सुनामी में बह गए और निवेशकों को तगड़ा घाटा कराया. लार्जकैप, मिडकैप से लेकर स्मॉलकैप तक लाल रंग में रंगे नजर आए. आइए जानते हैं शेयर मार्केट क्रैश होने के पीछे के पांच बड़े कारणों के बारे में...
सेंसेक्स-निफ्टी दिनभर टूटे शेयर मार्केट में सोमवार को आई बड़ी गिरावट पर नजर डालें, तो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स इंडेक्स अपने पिछले बंद 78,918.90 की तुलना में गिरकर 77,056 पर खुला और फिर 76,424 तक फिसला था. अंत में ये इंडेक्स रिकवरी मोड में नजर आया फिर भी 1352.74 अंक की गिरावट लेकर 77,566.16 के लेवल पर बंद हुआ.
बात निफ्टी की करें, तो ये 50 शेयरों वाला एनएसई इंडेक्स भी अपने पिछले बंद 24,450 की तुलना में 23,868 पर ओपन हुआ और शुरुआती कारोबार में ही गिरते हुए 23,697 के लेवल तक गया था. हालांकि, बाजार बंद होने पर Nifty भी 422 अंक की गिरावट लेकर 24,028.05 पर बंद हुआ.
शेयर बाजार में क्यों आई बड़ी गिरावट? Share Market Crash होने के पीछे के बड़े कारणों की बात करें, तो एक नहीं, बल्कि तमाम वजह हैं. इनमें सबसे बड़ा रोल मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का है, जो अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहा है.
पहला कारण: जंग से तेल की कीमतों में उछाल शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका-इजराइल के साथ ईरान के युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी ग्लोबल टेंशन है. सोमवार को Brent Crude Oil Price 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिसने बाजार में गिरावट को रफ्तार दी. हालांकि, अंत में क्रूड के दाम भी टूटते नजर आए और इसके साथ ही बाजार में रिकवरी भी दिखी. कतर, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादकों द्वारा प्रोडक्शन कटौती के ऐलान के साथ ही होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल संकट सामने खड़ा हुआ है.
दूसरा कारण: भारत पर असर का डर भले ही ग्लोबल टेंशन के बीच बढ़े तेल के दाम को लेकर सरकार की ओर से पर्याप्त रिजर्व होने की बात कही जा रही है, लेकिन भारत की तेल आयात पर निर्भरता से डर कम नहीं हो पा रहा है और इसका असर बाजार पर देखने को मिल रहा है. दरअसल, भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है. Oil-Gas Price Surge से देश में पेट्रोल , डीजल,गैस और हवाई ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ता है और इससे महंगाई का जोखिम भी रहता है.

US-Iran War: 'जंग के जिम्मेदार देशों को निपटना होगा...', भारत ने ठुकराई ऑयल रिजर्व जारी करने की अपील
इंटरनेशलन एनर्जी एजेंसी की ओर से भारत से अपील की गई थी कि वह तेल की कीमतों को कम करने के लिए ऑयल रिजर्व जारी करे, जिसे भारत ने ठुकरा दिया है. ऐसा एक रिपोर्ट में दावा किया गया है.

फरवरी के अंत में कच्चे तेल की कीमतें 68 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अमेरिका और इज़रायल के ईरान पर हमले के बाद बढ़कर 110 डॉलर तक पहुंच गई हैं. यदि यह स्थिति इसी तरह बनी रहती है, तो आने वाले एक महीने में तेल की कीमतें 200 डॉलर तक पहुंच सकती हैं. ईरान ने UAE, सऊदी अरब, कतर और ओमान की रिफाइनरी और LNG संयंत्रों पर हमला किया है, जिससे उत्पादन रुक गया है. तेल का ये संकट दुनिया के लिए कितनी बड़ी मुश्किल खड़ी कर देगा? देखें वीडियो.











