
US ने समुद्र में की वेनेजुएला की घेराबंदी, तीसरे ऑयल टैंकर पर बोला धावा, दो कर चुका है जब्त
AajTak
अमेरिका ने वेनेजुएला से जुड़े एक और तेल टैंकर का पीछा शुरू किया है. अमेरिका का कहना है कि यह जहाज वेनेजुएला की डार्क फ्लीट का हिस्सा है और जिसका इस्तेमाल प्रतिबंधों से बचकर तेल ढुलाई के लिए किया जा रहा है.
निकोलस मादुरो की सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वेनेजुएला से जुड़े एक और तेल टैंकर का पीछा शुरू कर दिया है. अमेरिकी अधिकारियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि यदि इस कार्रवाई के तहत टैंकर को जब्त किया जाता है, तो यह पिछले दो हफ्तों में तीसरी ऐसी जब्ती होगी.
यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले सप्ताह वेनेजुएला में आने-जाने वाले प्रतिबंधित तेल टैंकरों पर पूर्ण नाकेबंदी की घोषणा के बाद उठाया गया है. अधिकारियों के अनुसार, जिस जहाज का पीछा किया जा रहा है, वह वेनेजुएला के तथाकथित 'डार्क फ्लीट' का हिस्सा है, जिनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचते हुए कच्चे तेल की गुप्त ढुलाई के लिए किया जाता है.
ऑपरेशन की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए अमेरिकी अधिकारियों ने टैंकर का नाम और उसकी सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं की है. हालांकि, मैरीटाइम रिस्क मैनेजमेंट कंपनी वैनगार्ड ने इस जहाज की पहचान ‘बेला-1’ के रूप में की है, जो अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की प्रतिबंध सूची में शामिल है. टैंकरट्रैकर्स डॉट कॉम के मुताबिक, यह जहाज रविवार को वेनेजुएला के जलक्षेत्र के पास पहुंचते समय खाली था. शिपिंग रिकॉर्ड्स बताते हैं कि बेला-1 ने वर्ष 2021 में वेनेजुएला का कच्चा तेल चीन तक पहुंचाया था और यह ईरानी तेल ढुलाई से जुड़े नेटवर्क का भी हिस्सा रहा है.
यह भी पढ़ें: 'अंतरराष्ट्रीय समुद्री डकैती...' तेल टैंकर जब्त किए जाने से वेनेजुएला अमेरिका पर भड़का
इससे पहले अमेरिका ने दो अन्य टैंकरों को जब्त किया था. पनामा के झंडे वाले जहाज ‘सेंचुरीज’ को शनिवार को रोका गया, जिसे व्हाइट हाउस ने वेनेजुएला के शैडो फ्लीट का हिस्सा बताया. इससे पहले ‘स्किपर’ नामक टैंकर को बिना राष्ट्रीय ध्वज के संचालन के आरोप में जब्त किया गया था. इन कार्रवाइयों पर प्रतिक्रिया देते हुए वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिका पर आक्रामक नीति अपनाने का आरोप लगाया है.
उन्होंने अमेरिकी तटरक्षक बलों की तुलना समुद्री लुटेरों से की और कहा कि वेनेजुएला तेल टैंकरों पर हमलों से लेकर साइकोलॉजिकल टेररिज्म तक की साजिशों का डटकर सामना कर रहा है. अमेरिका ने हाल के दिनों में वेनेजुएला तट के पास प्रशांत महासागर और कैरिबियन सागर में कथित ड्रग ले जाने वाले जहाजों पर दो दर्जन से अधिक सैन्य हमले किए हैं, जिनमें कम से कम 100 लोग मारे गए हैं. ये हमले निकोलस मादुरो पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से हैं.

इजरायल की Haifa Refinery पर हुए ईरानी हमले में अहम बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है. हमला रिफाइनरी से जुड़े एक थर्ड-पार्टी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ, जो ऑपरेशन के लिए जरूरी था. कंपनी के मुताबिक, कुछ दिनों में फिर से पूरी तरह संचालन शुरू होने की उम्मीद है. ज्यादातर प्रोडक्शन यूनिट्स फिलहाल चालू हैं. देखें वीडियो.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

महायुद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है...लेकिन बम-बारूद-गोले थम ही नहीं रहे ..। कहां तो युद्ध ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने से रोकने के लिए शुरू हुआ...और कहां ये जंग तेल युद्ध बनकर दुनिया को धधका रहा है...। समझ नहीं आ रहा कि ये जंग किसे धुरंधर बना रहा...एक तरफ तबाही है...तो दूसरी तरफ तेल-गैस-हीलियम संकट...जो हर घर...हर परिवार पर असर डाल रहा है..

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में अब तेल-गैस के ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ गया है. पूरे दुनिया पर ऊर्जा का संकट बढ़ता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में पहले ही उथल-पुथल मची है. अब दोनों ओर से ताजा हमलों से पूरी दुनिया महंगाई के बड़े संकट की ओर बढ़ती जा रही है. देखें लंच ब्रेक.

चाहे हालात शांति के हों या युद्ध जैसे तनावपूर्ण, जिंदगी कभी नहीं रुकती, इसकी मिसाल लेबनान में देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए हजारों लोग, जो काम के सिलसिले में लेबनान में रह रहे हैं, उन्होंने इजरायली हमलों और तमाम चुनौतियों के बावजूद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया. संघर्ष और अनिश्चितता के बीच भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं.

होर्मुज को लेकर तनातनी जारी है. इस बीच छह देशों ने एक बयान जारी किया है ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने कहा है कि वे हॉर्मुज़ में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं. हालांकि, इटली, जर्मनी और फ्रांस ने बाद में स्पष्ट किया कि वे तत्काल किसी सैन्य सहायता की बात नहीं कर रहे हैं. इन देशों ने क्या शर्त रखी है. जानें.







