
UP MLC Election: जानें विधानसभा चुनाव से कैसे अलग है मतदान और मतगणना का तरीका
AajTak
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव को लेकर मतदान जारी है. 27 सीटों पर आज वोटिंग हो रही है. 9 सीटें बीेजेपी निर्विरोध जीत चुकी है. लेकिन सवाल ये है कि दूसरे चुनावों की तुलना में विधान परिषद चुनाव में क्या अलग होता है, कैसे वोटिंग होती है, कौन मतदाता रहता है?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद अब बारी विधान परिषद के चुनाव की है. सूबे में स्थानीय निकाय की 27 एमएलसी सीटों पर चुनाव के लिए शनिवार को मतदान शुरू हो गया है, जहां पर 95 प्रत्याशियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. 58 जिलों के 739 बूथों पर 120657 मतदाता वोटिंग कर रहे हैं. लेकिन, एमएलसी के चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया विधानसभा या अन्य चुनाव से पूरी तरह अलग होती है और मतगणना का तरीका भी भिन्न है.
मतगणना की प्रक्रिया कैसे अलग?
एमएलसी चुनाव में मतदान और मतगणना की प्रक्रियाएं बाकी चुनाव से बिल्कुल अलग होती हैं. एमएलसी चुनाव में बैलेट पेपर पर चुनाव निशान नहीं बल्कि कैंडिडेट के नाम होते हैं. बैलेट पेपर पर उम्मीदवार के नाम के सामने मुहर नहीं लगाना होता और न ही किसी तरह का स्केच पेन से मतपत्र पर मूल्यांकन कर मतदान करना होता है. मतदाता अन्य चुनावों में किसी एक प्रत्याशी को वोट देता है, लेकिन विधान परिषद चुनाव में एक से ज्यादा प्रत्याशियों को वरीयता क्रम में वोट देने का विकल्प रहता है.
विधान परिषद चुनाव में मतदान केंद्रों पर चुनाव कर्मियों द्वारा जो पेन दी जाएगी, उसी के जरिए मतदाताओं को बैलेट पेपर में अपनी पसंद के उम्मीदवार के नाम के आगे अंक लिखकर मतदान करना होता है. एमएलसी चुनाव में किसी भी हाल में मतदाता बैलेट पर ना तो हस्ताक्षर कर सकेंगे, ना ही अंगूठे का निशान लगा सकेंगे. मतदाताओं के लिए स्पष्ट निर्देश होता कि वे यदि मतपत्र पर हस्ताक्षर करते हैं या अंगूठे का निशान लगाते हैं तो उनका मत बेकार चला जाएगा. इसीलिए उम्मीदवार मतदाताओं को चुनाव अपने चुनाव प्रचार के दौरान बैलेट पेपर अपने क्रमांक को बताते हैं.
एमएलसी चुनाव में कौन मतदाता
स्थानीय निकाय की विधान परिषद की 27 सीटों पर वोटिंग में आम लोग वोट नहीं करते बल्कि जनता के द्वारा चुने जाने वाले स्थानीय प्रतिनिधि होते हैं. इसीलिए क्षेत्र के सांसद, विधायक, सभी प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी), ब्लाक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ नगर निगम के पार्षद, मेयर, नगर पालिका व पंचायतों के पार्षद और अध्यक्ष मतदान करते हैं. इसके अलाव एमएलसी भी मतदाता होते हैं. इसीलिए कैंडिडेट सीधे मतदाताओं से संपर्क वोट मांगते हैं.

ग्रेटर नोएडा में कोहरे के कारण पानी से भरे बेसमेंट में गिरी कार हादसे में 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई. मौके पर मौजूद डिलिवरी ब्वॉय ने रस्सी बांधकर पानी में उतरकर बचाने की कोशिश की. लेकिन युवराज को बचाया नहीं जा सका. नोएडा के इंजीनियर युवराज की मौत के बाद डिलिवरी ब्वॉय को क्यों धमका रही पुलिस?

ट्रंप की ईरान को दी गई उस धमकी के बारे में बताएंगे जिसमें उन्होंने कहा कि कि ईरान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा. उनका ये बयान उस संदर्भ में आया है जिसमें दावा किया जा रहा है कि ईरान ट्रंप की हत्या कर सकता है. इस पर ट्रंप ने कहा अगर उन्हें कुछ भी हुआ तो अमेरिका की सेनाएं ईरान को धरती के नक्शे से मिटा देंगी. आज इस बात का विश्लेषण करेंगे कि क्या वाकई ईरान ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा है?

मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर विवाद गहराया है. अविमुक्तेश्वरानंद सरकार पर कड़े तेवर दिखा रहे हैं. उन पर शंकराचार्य के अपमान का आरोप लगा है. समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर बैठकर अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान करने से प्रशासन ने रोक लगा दी. समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.







