
UP: लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आवंटित कर दिया जर्जर मकान, आवंटी ने बताया 'भूत बंगला'
AajTak
इस भुतहा और जर्जर मकान से परेशान आवंटी ने लखनऊ विकास प्राधिकरण के सामने शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन प्राधिकरण द्वारा कोई भी शिकायत नहीं सुनी गई.
लखनऊ में लखनऊ विकास प्राधिकरण ने एक आवंटी को एकदम टूटा, जर्जर और भुतहा बंगले जैसा दिखाई देने वाला मकान आवंटित कर दिया है. ये हालत तब है जबकि सरकार द्वारा लखनऊ विकास प्राधिकरण के लिए लाखों रुपए आवंटित किए गए हैं. इस भुतहा और जर्जर मकान से परेशान आवंटी ने विकास प्राधिकरण के सामने शिकायत भी दर्ज कराई है लेकिन प्राधिकरण द्वारा कोई भी शिकायत नहीं सुनी गई है. आजतक को मिली जानकारी के मुताबिक लखनऊ के गोमती नगर स्थित नेहरू इन्क्लेव में विशाल द्विवेदी और उनकी मां सुमन द्विवेदी को एक फ्लैट आवंटित हुआ था. जिसकी अभी तक रजिस्ट्री भी नहीं की गई है लेकिन फ्लैट लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटी को सौंप दिया गया है. आवंटी जब अपने फ्लैट पर पहुंचा तो वहां का नजारा देख कर चौक गया. आवंटित किया हुआ फ्लैट एकदम भूत बंगला जैसा लग रहा था. जिसकी दीवारें जर्जर हो चुकी हैं. कमरे की दीवारों से पलस्तर तक गिर चुका है. दीवारें टूटी हुई भी हैं.
2002 का वह दिन था. पश्चिम एशिया के सात देशों के सात राजदूत दिल्ली में संघ के मुख्यालय 'केशव कुंज' में केएस सुदर्शन के साथ वार्त्तालाप करने के लिए उपस्थित थे. सभी राजदूत संघ प्रमुख केएस सुदर्शन की बातें सुनने के लिए दो घंटे तक जमीन पर बैठे रहे. इस चर्चा में के एस सुदर्शन ने भारत की हजारों वर्षों की समावेशी परंपरा से मुस्लिम देशों के राजदूतों को अवगत कराया. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.

पुणे शहर में एक गंभीर सड़क हादसा उस समय हुआ जब एक नशे में धुत चालक ने तेज रफ्तार से वाहन चलाते हुए अपना संतुलन खो दिया. दुर्घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें वाहन सीधे सड़क किनारे लगे दुकानों से टकराता दिख रहा है. जोरदार टक्कर की वजह से दुकानों के शटर, सामान और ढांचे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए. इस घटना के बाद पुलिस ने चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर वाहन को जब्त कर लिया है.

रिटायर्ड एसबीआई निदेशक राजकुमार मेहता को उनका बेटा युवराज फोन करता है 'मुझे बचा लीजिए, मैं डूब जाऊंगा… मेरी कार नाले में गिर गई है.' आधे घंटे बाद पिता घटना स्थल पर पहुंचते हैं. पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ के 80 कर्मचारी मौजूद होने के बावजूद संसाधनों की कमी और जोखिम के डर के चलते कोई पानी में नहीं उतरता. निक्कमे सिस्टम और बेबस पिता के सामने ही युवराज तड़प-तड़प कर दम तोड़ देता है.










