
तीन विभाग, 80 कर्मचारी, निकम्मा सिस्टम और बेबस पिता! 2 घंटे यूं तड़पता रहा नोएडा का युवराज
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रिटायर्ड एसबीआई निदेशक राजकुमार मेहता को उनका बेटा युवराज फोन करता है 'मुझे बचा लीजिए, मैं डूब जाऊंगा… मेरी कार नाले में गिर गई है.' आधे घंटे बाद पिता घटना स्थल पर पहुंचते हैं. पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ के 80 कर्मचारी मौजूद होने के बावजूद संसाधनों की कमी और जोखिम के डर के चलते कोई पानी में नहीं उतरता. निक्कमे सिस्टम और बेबस पिता के सामने ही युवराज तड़प-तड़प कर दम तोड़ देता है.
रात के लगभग बारह बजे, नोएडा की टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी में रहने वाले एसबीआई से निदेशक रिटायर्ड राजकुमार मेहता को उनका बेटा फोन करता है. दूसरी ओर से घबराई हुई आवाज में वह कहता है 'मुझे बचा लीजिए, मैं डूब जाऊंगा..' मेरी कार नाले में गिर गई है. यह सुनते ही राजकुमार मेहता घर से भाग पड़ते हैं. आधे घंटे में वह घटना स्थल पर पहुंचते हैं. बेटे को फिर फोन करते हैं. कहां हो ? वह अपने मोबाइल का टॉर्च जलाकर दिखाता है. वह कार के ऊपर लेटा है. लेटा इसलिए कि कार का बैलेंस ना बिगड़े. वह बीच-बीच में हेल्प-हेल्प भी चिल्लाता रहा.
पुलिस, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की लगभग 80 कर्मियों की टीमें मौके पर मौजूद थीं. लेकिन इस बड़े ऑपरेशन में भी एक झलक नहीं थी कि कोई तुरंत पानी में उतरकर युवराज तक पहुंचे. संसाधनों की कमी, जोखिम का डर और निक्कमा सिस्टम इन सब के बीच एक पिता की आंखों के सामने उसका बेटा तड़प-तड़प कर दम तोड़ देता है.
हादसा कहां और कैसे हुआ
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित टी-प्वाइंट पर देर रात युवराज की ग्रैंड विटारा कार तेज रफ्तार और कोहरे के कारण अनियंत्रित होकर गहरे नाले की दीवार तोड़ती हुई पानी से भरे बेसमेंट में जा गिरी. यह इलाका एमजेड विशटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्लॉट के पास है, जिसमें पहले से ही करीब 50 फुट गहरा गड्ढा खोदा गया था. सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि गड्ढे के आसपास न तो कोई मजबूत बैरिकेडिंग थी, न कोई रिफ्लेक्टर, न चेतावनी बोर्ड. रात के समय कोहरे में यह मौत का जाल बन गया. पिता राजकुमार मेहता ने कहा, सेक्टर-150 के निवासियों ने पहले भी कई बार प्राधिकरण से मांग की थी कि नाले और गड्ढे के आसपास मजबूत बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर और साइन बोर्ड लगाए जाएं. लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
जैसे ही पिता ने डायल-112 पर सूचना दी, नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची. इसके बाद फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीम भी घटनास्थल पर पहुंची. कुल मिलाकर लगभग 80 कर्मचारी ऑपरेशन में शामिल थे. लेकिन किसी ने भी पानी में उतरने की हिम्मत किसी में नहीं थी. अधिकारियों का कहना था कि पानी ठंडा है, अंदर सरिया हो सकता है, जोखिम अधिक है. इस बीच युवराज लगातार कार की छत से टॉर्च जलाता और “बचाओ… बचाओ…” चिल्लाता रहा. हर मिनट की देरी उसके जीवन और मौत के बीच फर्क पैदा कर रही थी.
राजकुमार मेहता बार-बार अधिकारियों से गुहार लगाते रहे. उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, मेरे बेटे को अभी बचा लीजिए. मैं कुछ भी कर लूंगा. लेकिन सिस्टम की सुस्ती और संसाधनों की कमी ने पिता की बेचैनी को और बढ़ा दिया. करीब डेढ़ घंटे तक युवराज पानी में तड़पता रहा. चश्मदीद मोनिंदर नामक युवक ने भी पानी में उतरकर मदद करने की कोशिश की, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी.

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