
UP: गोरखपुर के BRD अस्पताल ने फिर किया चमत्कार, 5 घंटे तक ऑपरेशन कर ऐसे बचाई नवजात की जान
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हॉस्पिटल प्रशासन के मुताबिक एक नवजात बच्चे के जन्म से ही उसके डायाफ्राम की झिल्ली में छेद होने से आंत, पेट व प्लीहा(स्पलीन) फेफड़े की बायीं ओर चले गए थे. इससे फेफड़ा दब रहा था और अल्प विकसित था. वहीं डायाफ्रामकी मांसपेशियां पीछे की तरफ थीं ही नहीं. इस वजह से आपरेशन बहुत जटिल था. लेकिन डाक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी.
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कालेज ने फिर एक बार कुछ चमत्कार किया है. बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों ने एक नवजात की जटिल शारीरिक समस्या का आपरेशन कर उसकी जान बचा ली है. दरअसल, बीआरडी के चिकित्सकों के सामने एक बेहद ही जटिल केस आया.
बच्चे के डायाफ्राम की झिल्ली में था छेद
हॉस्पिटल प्रशासन के मुताबिक एक नवजात बच्चे के जन्म से ही उसके डायाफ्राम की झिल्ली में छेद होने से आंत, पेट व प्लीहा(स्पलीन) फेफड़े की बायीं ओर चले गए थे. इससे फेफड़ा दब रहा था और अल्प विकसित था. वहीं डायाफ्रामकी मांसपेशियां पीछे की तरफ थीं ही नहीं. इस वजह से आपरेशन बहुत जटिल था. लेकिन डाक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी. डायाफ्राम की झिल्ली के छेद को छाती की मांसपेशियों से जोड़कर आपरेशन कर दिया. जिसमें कुल पांच घंटे का समय लगा. अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है. उसे सकुशल अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया है.
सफल ऑपरेशन कर नवजात को बचाया गया
मिली जानकारी के अनुसार गोरखपुर से सटे बस्ती मंडल के सिद्धार्थनगर की पुनीता ने बच्चे को एक मार्च को बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया. उसका जन्म सिद्धार्थनगर के अस्पताल में हुआ था. जन्म के बाद से ही उसकी सांसफूल रही थी और दूध भी पीने में कठिनाईयों का सामना कर रहा था. जिला अस्पताल के डाक्टरों ने बीआरडी मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया. मेडिकल कालेज में सभी जरूरी जांच के बाद स्वजन की अनुमति लेकर पीडियाट्रिक सर्जन डा. रेनू कुशवाहा ने आपरेशन किया.
इसमें बाल रोग विशेषज्ञ डा. अभिषेक व एनेस्थीसिया डॉक्टर डॉ. सुनील आर्या व डा. शहबाज ने सहयोग किया. इसके बाद सफल ऑपरेशन कर नवजात बच्चे को बचाया गया. दरअसल गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में रोजाना ऐसे चमत्कार होते है. जबकि गोरखपुर मंडल के चार जिले औरबस्ती मंडल के तीन जिले स्वास्थ के लिहाज से अभी भी गोरखपुर के इस मेडिकल कॉलेज पर निर्भर रहते है.

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