
Shani Pradosh Vrat: 14 या 15 फरवरी, साल का पहला शनि प्रदोष व्रत कब? जानें तारीख और मुहूर्त
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फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी को शाम 04:01 बजे से लेकर 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी को ही मान्य होगा.
Shani Pradosh Vrat: हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. यह व्रत भगवान शिव को समर्पित है. प्रदोष व्रत जब शनिवार के दिन पड़ता है तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. 14 फरवरी को प्रदोष व्रत आने वाला है. यह व्रत इसलिए भी खास है, क्योंकि यह साल का पहला शनि प्रदोष व्रत है. इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ शनि देव की पूजा से भी विशेष लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं. आइए इसका महत्व और पूजन विधि जानते हैं.
शनि प्रदोष व्रत का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा और शनि देव के प्रकोप से मुक्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है. इस दिन शिवजी की कृपा से भक्तों को सुख-शांति. आर्थिक उन्नति होती है. जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. संतान सुख की कामना और संतान की उन्नति के लिए भी यह दिन खास माना जाता है. इसके अलावा, जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैया या महादशा चल रही है, उन्हें भी इस दिन पूजा-अर्चना से विशेष लाभ मिलते हैं.
2026 का पहला शनि प्रदोष व्रत कब है? हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी तिथि 14 फरवरी को शाम 04:01 बजे से लेकर 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत 14 फरवरी को ही मान्य होगा.
पूजा का शुभ मुहूर्त शनि प्रदोष व्रत की पूजा शाम को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करना ही उचित होता है. भगवान शिव की पूजा के लिए यही समय सबसे श्रेष्ठ माना गया है. 14 फरवरी को प्रदोष काल शाम 06:10 बजे से लेकर रात 08:44 बजे तक रहने वाला है. इस दिन भक्तों को पूजा के लिए करीब ढाई घंटे का समय मिलने वाला है.
व्रत और पूजा की विधि शनि प्रदोष व्रत के दिन श्रद्धालु सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक निराहार व्रत रखते हैं. कुछ भक्त फलाहार भी ये व्रत रखतें हैं. इस दिन सुबह स्नानादि के बाद व्रत का संकल्प लें. पूरे दिन भगवान शिव की भक्ति में लीन रहें. शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल चढ़ाएं. धूप, दीप, बेलपत्र, दूध, मिठाई आदि अर्पित करें. फिर शाम के समय प्रदोष काल में विधिपूर्वक महादेव की पूजा करें.
इसके बाद शनि मंदिर में सरसों के तेल में काले तिल मिलाकर दीपक जलाएं. शनि चालीसा का पाठ करें. आखिर में काले तिल, उड़द की दाल या सरसों के तेल का दान करें. आप चाहें तो सामर्थ्य के अनुसार धन का दान भी कर सकते हैं. इसके बाद शनि देव से अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करें.

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