
Purvanchal Expressway: पीएम आज करेंगे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का लोकार्पण, इन शहरों से होकर गुजरेगा
Zee News
Purvanchal Expressway: यह एक्सप्रेसवे बिहार की सीमा तक है, इसलिए इसका लाभ बिहार के सीमावर्ती जिलों को भी सीधे मिल सकेगा.
लखनऊ: Purvanchal Expressway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को 341 किमी लंबे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे. राज्य के नौ जिलों को जोड़ने वाले पूर्वाचल एक्सप्रेस-वे के नजदीकी क्षेत्रों उद्योगों के विकास के साथ शैक्षणिक व स्वास्थ्य संस्थान, रोजगार की नई राह भी खुलेगी. यह एक्सप्रेसवे लखनऊ, बाराबंकी, फैजाबाद, आंबेडकरनगर, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर से होकर निकल रहा है. इसके बनने से दिल्ली से गाजीपुर का सफर करीब 10 घंटे में पूरा किया जा सकेगा. Prime Minister Narendra Modi to inaugurate the 341 Km long Purvanchal Expressway at Karwal Kheri in Sultanpur district today. Visuals from the expressway.
योगी ने लिया कार्यक्रम स्थल का जायजा — ANI UP (@ANINewsUP)

Rafale vs J-20 Mighty Dragon: राफेल और चीन के J-20 माइटी ड्रैगन के बीच तुलना में स्टील्थ बनाम सेंसर शक्ति की बहस तेज है. J-20 को रडार से बचने में बढ़त मिल सकती है, जबकि राफेल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर फ्यूजन में मजबूत है. आधुनिक हवाई युद्ध में नेटवर्क, मिसाइल रेंज और रणनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

India AI Impact Summit: यह समिट आम लोगों के लिए खुलेगा. इसमें दिखेगा कि AI असल जिंदगी में कैसे काम करता है. यह खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेली के समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है. Expo में 70000 वर्ग मीटर से बड़ा एरिया होगा. जिसमें 30 से अधिक देशों की 300+ कंपनियां अपने AI प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी दिखाएंगी. छात्रों के लिए YUVAi और AI for ALL जैसे प्रोग्राम होंगे.

Vibhav Anti-Tank Mines: विभव माइन को खास तौर पर मोबिलिटी किल यानी दुश्मन टैंक को पूरी तरह नष्ट करने के लिए नहीं बनाया गया है. बल्कि उसकी गति रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. यह टैंक के ट्रैक, सस्पेंशन या ड्राइव सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर उसे वहीं रोक देती है. इससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाता है. इससे आसान निशाना बन जाता है.

DISC 12 Helicopter Landing System: भारत में हेलिकॉप्टर अक्सर पहाड़ी इलाकों, अग्रिम चौकियों और अस्थायी हेलिपैड पर उतरते हैं. जहां बुनियादी ढांचा बहुत कम होता है. ऐसे स्थानों पर पायलट अधिकतर दृश्य संकेतों के आधार पर लैंडिंग करते हैं. लेकिन कोहरा, धूल, बर्फबारी या खराब मौसम की स्थिति में यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है.









