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'100 फेलियर के बाद सफल हुआ मिसाइल प्रोग्राम', DRDO महानिदेशक बोले- भारत अब स्वदेशी एयर डिफेंस से रक्षा करने में सक्षम
Zee News
India Air defence: डीआरडीओ महानिदेशक ने कहा कि भारत आज स्वदेशी तकनीक के दम पर अपनी सुरक्षा करने में सक्षम है. ऑपरेशन सिंदूर में आकाश एयर डिफेंस और ब्रह्मोस मिसाइल ने शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने बताया कि मिसाइल कार्यक्रम में सफलता से पहले करीब 100 असफल प्रयास हुए, जिनसे सीखकर भारत वैश्विक मिसाइल शक्ति बना.
India Air defence: भारत इस समय मिसाइल, फाइटर जेट, एयर डिफेंस, ड्रोन, सबमरीन से लेकर युद्धपोत तक बनाता है. दुनिया के ऐसे कम ही देश हैं, जो अपने दम पर मिसाइल और फाइटर जेट बनाते हैं. ऐसे में कह सकते हैं कि भारत तूफानी रफ्तार से डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन इस रफ्तार के पीछे दशकों की मेहनत है. इस सफलता के पीछे सैकड़ों असफल प्रयास हैं. इसका जिक्र DRDO के महानिदेशक विनय कुमार दास ने करते हुए एक अहम खुलासा किया है. इसके अलावा एक दावा भी ठोका है.

Rafale vs J-20 Mighty Dragon: राफेल और चीन के J-20 माइटी ड्रैगन के बीच तुलना में स्टील्थ बनाम सेंसर शक्ति की बहस तेज है. J-20 को रडार से बचने में बढ़त मिल सकती है, जबकि राफेल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर फ्यूजन में मजबूत है. आधुनिक हवाई युद्ध में नेटवर्क, मिसाइल रेंज और रणनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

India AI Impact Summit: यह समिट आम लोगों के लिए खुलेगा. इसमें दिखेगा कि AI असल जिंदगी में कैसे काम करता है. यह खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा और डेली के समस्याओं को हल करने में मदद कर सकता है. Expo में 70000 वर्ग मीटर से बड़ा एरिया होगा. जिसमें 30 से अधिक देशों की 300+ कंपनियां अपने AI प्रोडक्ट्स और टेक्नोलॉजी दिखाएंगी. छात्रों के लिए YUVAi और AI for ALL जैसे प्रोग्राम होंगे.

Vibhav Anti-Tank Mines: विभव माइन को खास तौर पर मोबिलिटी किल यानी दुश्मन टैंक को पूरी तरह नष्ट करने के लिए नहीं बनाया गया है. बल्कि उसकी गति रोकने के लिए डिजाइन किया गया है. यह टैंक के ट्रैक, सस्पेंशन या ड्राइव सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर उसे वहीं रोक देती है. इससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो जाता है. इससे आसान निशाना बन जाता है.

DISC 12 Helicopter Landing System: भारत में हेलिकॉप्टर अक्सर पहाड़ी इलाकों, अग्रिम चौकियों और अस्थायी हेलिपैड पर उतरते हैं. जहां बुनियादी ढांचा बहुत कम होता है. ऐसे स्थानों पर पायलट अधिकतर दृश्य संकेतों के आधार पर लैंडिंग करते हैं. लेकिन कोहरा, धूल, बर्फबारी या खराब मौसम की स्थिति में यह तरीका जोखिम भरा हो सकता है.

Boeing P-8I Neptune Aircraft: Boeing P-8I Neptune विमानों की अतिरिक्त खरीद की जा रही है. इससे लंबी दूरी की एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW), समुद्री निगरानी और समुद्री हमले की क्षमता को मजबूत करेगी. यह विमान अमेरिकी कंपनी Boeing द्वारा बनाए जाते हैं. इन 6 विमानों के शामिल होने के बाद भारतीय नौसेना के पास कुल 18 P-8I विमान हो जाएंगे. इससे भारत, अमेरिका के बाद, इस विमान परिवार का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर बन जाएगा.








